जिले के नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पूर्व माध्यमिक शाला (मिडिल स्कूल) मरका से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल में पदस्थ गणित शिक्षक हरजीत अनंत पिछले करीब तीन वर्षों से नियमित रूप से स्कूल नहीं आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम से हर महीने वेतन का भुगतान किया जा रहा है। स्थानीय लोगों और छात्रों का कहना है कि शिक्षक अपनी सुविधा के अनुसार कभी-कभार ही स्कूल पहुंचते हैं, जबकि अधिकांश समय उनकी अनुपस्थिति बनी रहती है। मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।स्कूल के छात्रों का कहना है कि हरजीत अनंत गणित विषय के शिक्षक हैं, लेकिन उन्होंने लंबे समय से नियमित रूप से कक्षाएं नहीं ली हैं।
छात्रों ने खोली शिक्षक की पोल
छात्रों के अनुसार, जब भी वे स्कूल आते हैं तो पढ़ाई कराने के बजाय कुछ समय रुककर वापस चले जाते हैं। गणित जैसे महत्वपूर्ण विषय की पढ़ाई की जिम्मेदारी स्कूल के अन्य शिक्षकों पर आ गई है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा के समय उन्हें दूसरे शिक्षकों के भरोसे रहना पड़ता है, क्योंकि संबंधित शिक्षक से उन्हें अपेक्षित मार्गदर्शन नहीं मिल पाता।
रजिस्टर में हाजिरी
सबसे गंभीर आरोप यह है कि शिक्षक की वास्तविक उपस्थिति और रिकॉर्ड में बड़ा अंतर दिखाई देता है। छात्रों और स्थानीय लोगों का दावा है कि शिक्षक भले ही स्कूल में नजर न आएं, लेकिन उपस्थिति रजिस्टर में उनकी पूरे महीने की उपस्थिति दर्ज रहती है। इतना ही नहीं, रजिस्टर में नियमित हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक शिक्षक की लापरवाही नहीं बल्कि विभागीय रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितता का मामला भी माना जा सकता है।सहकर्मी भी परेशान
स्कूल के अन्य शिक्षक भी इस स्थिति से असहज बताए जा रहे हैं। हालांकि, विभागीय कार्रवाई या अन्य कारणों के डर से कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, कई बार इस विषय पर अंदरूनी स्तर पर चर्चा हुई, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका। इससे यह भी सवाल उठता है कि यदि स्कूल के भीतर लंबे समय से ऐसी स्थिति बनी हुई है तो संबंधित अधिकारियों तक इसकी जानकारी क्यों नहीं पहुंची या पहुंचने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
अधिकारियों को जानकारी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले की जानकारी शिक्षा विभाग के कई जिम्मेदार अधिकारियों, जिनमें DEO, BEO, CSC और ABEO शामिल हैं, को पहले से है। इसके बावजूद अब तक न तो किसी प्रकार की जांच शुरू की गई और न ही संबंधित शिक्षक के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। इससे विभाग की जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों प्रभावित होती हैं।
अधिकारियों की चुप्पी
स मामले में जब जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अभय जायसवाल से संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने शहर से बाहर होने की बात कहते हुए फोन काट दिया। वहीं, जिले की कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। अधिकारियों की चुप्पी ने मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है।अब उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
पूरा मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आरोप सही हैं, तो आखिर बिना नियमित उपस्थिति के शिक्षक के नाम पर वेतन कैसे जारी होता रहा? उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज हाजिरी की जिम्मेदारी किसकी है? क्या विभागीय अधिकारियों ने शिकायतों के बावजूद मामले को नजरअंदाज किया, या फिर किसी स्तर पर संरक्षण मिलने के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी? अब स्थानीय लोगों और अभिभावकों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।