आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए धमतरी जिले का जिला प्रशासन और कृषि विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। किसानों को खाद-बीज की किल्लत न हो और वे कालाबाजारी का शिकार न हों, इसके लिए कलेक्टर के निर्देश पर विशेष उड़नदस्ता टीमों का गठन किया गया है। कृषि विभाग की इन टीमों ने जिले के विभिन्न विकासखंडों में संचालित उर्वरक विक्रय केंद्रों पर औचक दबिश दी, जिससे नियम विरुद्ध काम करने वाले व्यापारियों में हड़कंप मच गया है।
निरीक्षण के दौरान टीम सबसे पहले मगरलोड विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम करेली छोटी स्थित 'वंदना खाद भंडार' पहुंची। यहाँ प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि किसानों से निर्धारित दर (एमआरपी) से अधिक कीमत वसूली जा रही है और उन्हें कम्प्यूटराइज्ड बिल भी नहीं दिया जा रहा है। जांच में ये सभी शिकायतें शत-प्रतिशत सही पाई गईं।
कड़े कानूनी कदम
लाइसेंस निलंबन के साथ ही विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दुकान के गोदाम और परिसर में रखी 859 बोरी रासायनिक उर्वरक को अपने कब्जे में लेकर जब्त कर लिया है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में उर्वरक नियंत्रण आदेश (फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर) के तहत आगे की दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जा रही है, ताकि भविष्य में कोई और व्यापारी ऐसी हिम्मत न कर सके।
जैविक खाद का अवैध भंडारण
पीओएस (POS) मशीन और स्टॉक
कुरूद विकासखंड में भी खाद की कालाबाजारी के खिलाफ बड़ा एक्शन देखने को मिला। यहाँ के 'चण्डी ट्रेडर्स' और 'किसान ट्रेडर्स' की जांच के दौरान पीओएस (POS) मशीन के डिजिटल रिकॉर्ड और दुकान में मौजूद वास्तविक स्टॉक के आंकड़ों में भारी अंतर (मिसमैच) पाया गया। इसके अलावा, दोनों ही दुकानों में न तो मूल्य सूची (प्राइस लिस्ट) टांगी गई थी और न ही उपलब्ध स्टॉक की जानकारी प्रदर्शित की गई थी।
