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Children return to schools in Bastar (Image Source: AI Photo)
Children return to schools in Bastar (Image Source: AI Photo)
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Bastar Education: बंदूकों के साए से बाहर निकला बस्तर, दो दशक बाद 600 से ज्यादा स्कूलों में फिर गूंजी बच्चों की किलकारी

Bastar Education: माओवादी हिंसा प्रभावित इलाकों में शिक्षा व्यवस्था फिर पटरी पर लौट रही है। 600 से अधिक स्कूलों में पढ़ाई शुरू होने के साथ स्मार्ट क्लास और स्थानीय भाषाओं में शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 05 Sep 2026, 10:32 AM · अपडेट: 16 Oct 2026, 01:03 AM
बस्तर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Bastar Education: छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और कभी माओवादी हिंसा से प्रभावित रहे अंचलों में अब बदलाव की एक नई बयार बह रही है। जिन बस्तर के जंगलों में करीब दो दशकों तक बंदूक की गोलियों, बारूद के धमाकों और खौफ का सन्नाटा पसरा रहता था, आज वहां की वादियों में सुबह-सुबह राष्ट्रगान की गूंज और बच्चों की पढ़ाई का शोर सुनाई दे रहा है। सुरक्षा और विकास के मोर्चे पर मिल रही सफलताओं के बीच बस्तर का यह नया चेहरा पूरे प्रदेश के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और प्रशासन की लगातार कोशिशों का ही नतीजा है कि बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे बेहद संवेदनशील जिलों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 

बच्चों को मिल सकते उनका हक 

माओवादी दौर में बंद पड़े या क्षतिग्रस्त कर दिए गए 600 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाई फिर से शुरू करा दी गई है। जर्जर हो चुके भवनों की मरम्मत में सुरक्षा बलों और स्थानीय ग्रामीणों ने हाथ बटाया, ताकि बच्चों को उनका हक वापस मिल सके। शिक्षा की इस वापसी में सबसे बड़ा योगदान स्थानीय शिक्षकों और 'शिक्षादूतों' का है।

अपनों की भाषा में पढ़ाई से भरोसा मजबूत

बस्तर के बच्चों और उनके परिजनों के मन से पढ़ाई और प्रशासन को लेकर हिचकिचाहट दूर करने के लिए शिक्षक अब गोंडी, हल्बी और डोरली जैसी स्थानीय बोलियों का सहारा ले रहे हैं। अपनों की भाषा में पढ़ाई मिलने से ग्रामीणों का भरोसा इतना मजबूत हुआ है कि जहां अब तक पक्के स्कूल भवन नहीं बन पाए हैं, वहां खुद ग्रामीणों ने बांस और तिरपाल जोड़कर अस्थायी शेड तैयार कर दिए हैं, ताकि एक भी दिन बच्चों की पढ़ाई न छूटे।

स्मार्ट क्लास से संवर रहा भविष्य

केवल पुरानी व्यवस्थाएं ही नहीं लौट रही हैं, बल्कि इन अंचलों के बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की तैयारी भी पूरी है।

  • फिर से शुरू हुए स्कूलों में अब स्मार्ट क्लास, टैबलेट, डिजिटल कंटेंट और खेल-कूद की सामग्रियां पहुंचाई जा रही हैं।

  • सरकार की 'नियद नेल्ला नार' (आपका अच्छा गांव) योजना ने इस पूरे इलाके का माहौल बदल दिया है।

कैंपों की मजबूती और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के चलते अब शिक्षक भी बिना किसी खौफ के अंदरूनी गांवों तक पहुंच रहे हैं। बस्तर में स्कूलों की घंटी सिर्फ पढ़ाई की शुरुआत भर नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि हिंसा को पछाड़कर अब जिंदगी वापस अपनी सामान्य पटरी पर लौट रही है।

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