किन्हें मिलेगा इस प्रोत्साहन राशि का लाभ?
सरकार ने इस योजना का फायदा उठाने के लिए कुछ स्पष्ट शर्तें तय की हैं:
पहली बार EPFO से जुड़ाव: कर्मचारी का 1 अगस्त 2025 से पहले कभी भी ईपीएफओ (EPFO) में पंजीकरण न हुआ हो।
नौकरी जॉइनिंग की समयसीमा: कर्मचारी की जॉइनिंग 1 अगस्त 2025 से लेकर 31 जुलाई 2027 के बीच होनी चाहिए।
सैलरी लिमिट: योजना का लाभ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जिनकी मासिक सैलरी ₹1 लाख तक है।
सेवा की निरंतरता: पहली किस्त के लिए कम से कम 6 महीने और दूसरी किस्त के लिए लगातार 12 महीने की सर्विस पूरी करना अनिवार्य है।
कंपनी का ईसीआर (ECR) नियम: जिस संस्थान या कंपनी में आप कार्यरत हैं, उसने ईपीएफओ में अपनी जरूरी रिपोर्टिंग और ईसीआर समय पर दाखिल किया हो।
कैसे और कितनी किस्तों में मिलेगी ₹15,000 की राशि?
यह प्रोत्साहन राशि कर्मचारियों को सीधे दो किस्तों में ट्रांसफर की जाएगी:
पहली किस्त: नौकरी के लगातार 6 महीने पूरे होने पर अधिकतम ₹7,500 दिए जाएंगे।
दूसरी किस्त: लगातार 12 महीने की नौकरी पूरी करने और एक विशेष ट्रेनिंग कोर्स करने के बाद बाकी बची राशि प्रदान की जाएगी।
ध्यान दें: इंसेंटिव की कुल रकम आपकी मंथली सैलरी के हिसाब से तय होगी। इसका मतलब यह है कि हर किसी को पूरे ₹15,000 ही मिलें, यह जरूरी नहीं है।
फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स क्यों बनाया गया अनिवार्य?
दूसरी किस्त का दावा करने के लिए कर्मचारियों को फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम (वित्तीय साक्षरता पाठ्यक्रम) पूरा करना होगा। सरकार का मकसद युवाओं में पैसे के सही प्रबंधन और बचत की आदत डालना है। इस कोर्स से जुड़ी सभी जानकारियाँ और प्रक्रिया PM-VBRY के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध हैं। योजना का पैसा सीधे कर्मचारी के आधार से जुड़े बैंक खाते में (DBT के जरिए) भेजा जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
कंपनियों को भी मिलेगा बड़ा फ़ायदा
यह योजना सिर्फ युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले संस्थानों (Employers) के लिए भी काफी फायदेमंद है। योजना के तहत योग्य नए कर्मचारियों को नियुक्त करने पर कंपनियों को प्रति कर्मचारी ₹3,000 प्रति माह तक का इंसेंटिव दिया जाएगा। इससे देश में नई नौकरियों के अवसर पैदा करने वाली कंपनियों को सीधा प्रोत्साहन मिलेगा।







