धार के चर्चित भोजशाला परिसर मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद शुक्रवार को प्रशासनिक हलचल तेज हो गई। जुमे की नमाज को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 611 और 612 की जमीन को वैकल्पिक स्थल के रूप में तय किया है। तय योजना के मुताबिक मुस्लिम समाज के लोग दोपहर में नमाज अदा करने के लिए निर्धारित स्थान पर पहुंचे।
नमाज के लिए पुश्तैनी जमीन पर एतराज
सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच दोपहर 3 बजे तक नमाज प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा तय की गई है। एक तरफ प्रशासन व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में लगा रहा, वहीं दूसरी तरफ नमाज के लिए तय की गई जगह पर विवाद खड़ा हो गया। स्थानीय ग्रामीणों ने इसे अपनी पुश्तैनी जमीन बताते हुए कड़ा एतराज जताया है।
पुश्तैनी हक का दावा: भू-स्वामी अभिनव बिजवा और पुष्पा बिजवा सहित कई रहवासियों का कहना है कि जिस जमीन पर टेंट और बैरिकेड्स लगाए गए हैं, वह उनकी निजी कृषि भूमि है।
बिना सहमति कार्रवाई: ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने उनसे बिना कोई बातचीत या सहमति लिए उनकी जमीन पर कब्जा जमाया है।
अदालत जाने की चेतावनी: नाराज भू-स्वामियों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी संपत्ति पर जबरन कोई कदम उठाया गया, तो वे अपने हक की लड़ाई के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
देर रात तक बैठकों का दौर, इलाके में भारी पुलिस बल
अदालत के निर्देशों को लागू करने के लिए धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने देर रात तक कानून-व्यवस्था की समीक्षा की। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए शुक्रवार सुबह से ही पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
प्रशासन का पक्ष: अधिकारियों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का शत-प्रतिशत पालन कराया जाएगा। इलाके में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है।