ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में नमाज अदा करने को लेकर पैदा हुआ सस्पेंस अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। देर रात जिला प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच लंबी बातचीत तो हुई, जिसमें तय स्थान पर नमाज के लिए सहमति बन गई, लेकिन पेंच अब भी फंसा हुआ है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे नमाज तभी पढ़ेंगे जब सुबह 11 बजे प्रशासन उन्हें नमाज स्थल की वास्तविक स्थिति दिखाएगा।
वहीं दूसरी ओर, जिस जगह पर नमाज की तैयारी चल रही है, उसे लेकर स्थानीय लोगों ने देर रात विरोध दर्ज करा दिया है। कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने प्रशासन के साथ हुई बैठक के बाद स्पष्ट किया कि भोजशाला के पीछे जिस जगह नमाज कराने की बात कही जा रही है, लगातार बारिश के कारण वहां जमीन काफी गीली है।
"प्रशासन हमें सुबह 11 बजे उस जगह का मुआयना कराएगा और दिखाएगा कि वहां क्या-क्या इंतजाम किए गए हैं। ग्राउंड देखने और व्यवस्थाओं को परखने के बाद ही हमारा समाज आगे का कोई अंतिम फैसला लेगा।" — अब्दुल समद, सदर (कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी)
हर किसी की नजर 11 बजे के निरीक्षण पर
ऐसे में अब हर किसी की नजरें सुबह 11 बजे होने वाले इस निरीक्षण पर टिकी हुई हैं। इसके बाद ही यह तय हो पाएगा कि दोपहर 1 से 3 बजे के तय समय में जुमा की नमाज हो पाएगी या नहीं। एक तरफ जहां प्रशासन व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुटा है, वहीं मामला एक नए विवाद में घिरता नजर आ रहा है। देर रात स्थानीय रहवासियों ने नमाज स्थल की जगह पर कड़ा एतराज जताया।
निजी जमीन पर धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं
रहवासियों का दावा है कि जिस जमीन पर नमाज की तैयारी की जा रही है, वह उनकी निजी कृषि (खेती) की भूमि है। उन्होंने प्रशासन के सामने स्पष्ट किया है कि उनकी निजी जमीन पर किसी भी धार्मिक आयोजन या नमाज की अनुमति बिल्कुल न दी जाए। इस नए एतराज ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अब्दुल समद ने सुप्रीम कोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि हाल में आया अदालती आदेश उनके पक्ष में रहा है, जिसे वे अपनी नैतिक जीत मानते हैं।पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर
अब मुस्लिम समाज का पूरा ध्यान 5 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली आगामी सुनवाई पर है। उन्हें उम्मीद है कि कोर्ट से इस बार भी उनके हक में सकारात्मक फैसला आएगा। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। परिसर और आसपास के इलाकों में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।
आवागमन के अलग रास्ते: किसी भी तरह के तनाव से बचने के लिए दोनों पक्षों के आने-जाने के रास्ते अलग-अलग तय किए गए हैं।
ग्राउंड को सुखाने का प्रयास: बारिश से गीली हुई जमीन को सुखाने और उसे नमाज योग्य बनाने के लिए वॉटरप्रूफिंग व अन्य अस्थायी इंतजाम किए जा रहे हैं।