भूकंप का कहर : 188 मौतें, 1,500 से ज्यादा घायल, काराकस में तबाही का मंजर
आपदा प्रबंधन और स्थानीय बचावकर्मी कड़कड़ाती ठंड और खौफ के बीच मलबे में दबे लोगों को तलाशने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं। इस हादसे में अब तक कम से कम 188 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
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कीर्तिमान न्यूज
26 Jun 2026, 07:38 AM
काराकस
वेनेज़ुएला की राजधानी काराकस और आसपास के इलाके इस वक्त सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हैं। बुधवार की शाम आई दो भूकंप की लहरों ने हंसते-खेलते शहरों को पल भर में मलबे के ढेर में बदल दिया है।
आपदा प्रबंधन और स्थानीय बचावकर्मी कड़कड़ाती ठंड और खौफ के बीच मलबे में दबे लोगों को तलाशने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं। इस हादसे में अब तक कम से कम 188 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। अस्पतालों में पैर रखने की जगह नहीं है और प्रशासन की मानें तो मौतों का यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकती है। सबसे दर्दनाक तस्वीरें राजधानी काराकस और इसके नजदीकी तटीय शहर 'ला ग्वाइरा' से आ रही हैं। यहाँ कई बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं।
मलबे में फंसे लोगों की मदद करते।एक ही झटके में हजारों परिवार बेघर
भूकंप के बाद जमींदोज हो चुकी इन इमारतों के नीचे से अब भी दबी हुई चीखें और मदद की गुहारें आ रही है। अपनों को खो चुके लोग बेबस होकर मलबे को अपने हाथों से हटाने की कोशिश कर रहे हैं। भूकंप से आई इस तबाही ने हज़ारों परिवारों को एक ही झटके में बेघर कर दिया है। शहर में अभी भी डर का माहौल ऐसा है कि जो इमारतें बची भी हैं, लोग उनके ढहने जाने के डर से अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। कड़कड़ाती ठंड भरी रात में हज़ारों लोग सड़कों और खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं।
कुछ ही सेकंड के अंतराल पर आए दो शक्तिशाली झटके
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के आंकड़ों ने इस तबाही की मुख्य वजह का खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार स्थानीय समयानुसार शाम 6:04 बजे पहले 7.2 तीव्रता का तगड़ा झटका महसूस किया गया। लोग संभल पाते, उससे ठीक कुछ सेकंड बाद ही 7.5 तीव्रता का दूसरा और कहीं अधिक विनाशकारी भूकंप आ गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों ही भूकंपों का केंद्र धरती की सतह के बेहद करीब (Shallow Earthquake) था। यही वजह है कि झटकों की तीव्रता इतनी मारक थी कि मजबूत कंक्रीट के ढांचे भी इसे बर्दाश्त नहीं कर सके। फिलहाल प्रभावित इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप है। युद्धस्तर पर चल रहे इस बचाव कार्य में सेना की मदद भी ली जा रही है, लेकिन मलबे का दायरा इतना बड़ा है कि वक्त बीतने के साथ ज़िंदगियों के बचने की उम्मीदें भी धुंधली होती जा रही हैं।