किसानों की हुंकार से दूसरे दिन भी थमी भोपाल की रफ्तार, मूंग की सरकारी खरीद और ई-टोकन बंद करने पर अड़े
मूंग की 100 फीसदी सरकारी खरीदी और खाद वितरण में ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा का आंदोलन भोपाल में दूसरे दिन भी जारी रहा। किसानों ने रातभर सड़क पर डेरा डालकर विरोध प्रदर्शन किया और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।
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कीर्तिमान न्यूज
29 Jul 2026, 07:53 AM
भोपाल
अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे किसानों का गुस्सा अब राजधानी की सड़कों पर साफ नजर आने लगा है। मूंग की 100 फीसदी सरकारी खरीदी और खाद वितरण में ई-टोकन व्यवस्था को खत्म करने जैसी प्रमुख मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन दूसरे दिन भी पूरी ताकत के साथ जारी रहा। किसानों ने दो टूक शब्दों में संदेश दे दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई लिखित या ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। मंगलवार देर रात तक जब प्रशासन और किसानों के बीच बात नहीं बनी, तो प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन स्थल को ही अपना अस्थायी आशियाना बना लिया।
इलाके को बदल दिया छावनी में
किसानों ने सड़क किनारे ही अपने भोजन की व्यवस्था की, चूल्हे जलाए और रातभर वहीं डटे रहे। दूसरी ओर, स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड़ पर है। मुख्यमंत्री निवास और उसके आसपास के तमाम रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इलाके को छावनी में बदल दिया गया है ताकि किसान आगे सीएम हाऊस घेराव की तैयारीन बढ़ सकें। राजधानी पहुंचने से पहले किसानों को रोकने के लिए प्रशासन ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। नर्मदापुरम से लेकर भोपाल के रास्ते में करीब 15 अलग-अलग जगहों पर पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग की थी।
धक्का-मुक्की और नोकझोंक: कई जगहों पर पुलिस ने किसानों को आगे बढ़ने से रोका, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस, खींचतान और धक्का-मुक्की की स्थितियां बनीं।
बढ़ते रहे कदम: इन तमाम रुकावटों और भारी पुलिस बल के बावजूद हजारों की संख्या में किसान एक-एक कर सभी बैरिकेड्स तोड़ते हुए आगे बढ़ते चले गए।
15 किसान संगठनों का संयुक्त मोर्चा
यह पूरा प्रदर्शन 'किसान क्रांति रैली' के बैनर तले निकाला जा रहा है। इसमें प्रदेश के करीब 15 छोटे-बड़े किसान संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हैं। किसानों का कहना है कि ई-टोकन व्यवस्था से खाद मिलने में भारी परेशानी आ रही है और मूंग की पूरी खरीदी न होने से उन्हें बिचौलियों को औने-पौने दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है। जब तक इन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता, भोपाल में उनका यह डेरा जमा रहेगा।