बिहार में कानून व्यवस्था बनाए रखने और आपातकालीन सेवा के लिए शुरू की गई 'डायल 112' की टीम खुद अपराधियों की 'सारथी' बन गई। नेपाल से बिहार की सीमा में घुसी 4 क्विंटल (400 किलो) से अधिक गांजे की एक बड़ी खेप को पकड़ने के बजाय, मधुबनी जिले की बासोपट्टी थाना पुलिस की डायल 112 जिप्सी उसे सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) दे रही थी। लेकिन बिहार STF (Special Task Force) की मुस्तैदी ने पुलिस-तस्करों के इस सनसनीखेज गठजोड़ का भंडाफोड़ कर दिया है।
यह पूरा मामला मधुबनी जिले के भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बासोपट्टी थाना क्षेत्र का है। बिहार एसटीएफ को एक पुख्ता खुफिया इनपुट मिला था कि नेपाल के रास्ते एक पिकअप वैन में भारी मात्रा में गांजा लोड कर भारतीय सीमा में प्रवेश कराया गया है। इस खेप को बासोपट्टी होते हुए वैशाली जिले में डिलीवरी के लिए ले जाया जाना था।
इनपुट मिलते ही जयनगर के एसडीपीओ (SDPO) के नेतृत्व में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की एक संयुक्त टीम ने बासोपट्टी-जयनगर मार्ग पर घेराबंदी की।
जब 'रक्षक' ही निकले तस्करों के 'एस्कॉर्ट'
कार्रवाई के दौरान जब एसटीएफ ने संदिग्ध पिकअप वैन को घेरा, तो नजारा देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। गांजे से लदी पिकअप वैन के आगे-आगे बासोपट्टी थाने की डायल 112 की सरकारी जिप्सी चल रही थी। पुलिस की यह गाड़ी तस्करों को रास्ता साफ करने (एस्कॉर्ट करने) और किसी भी संभावित खतरे या चेकिंग से बचाने के लिए पायलट वैन की तरह काम कर रही थी।
एसटीएफ को तुरंत माजरा समझते देर नहीं लगी। टीम ने न सिर्फ गांजे से भरी पिकअप वैन को जब्त किया, बल्कि आगे चल रही डायल 112 की सरकारी गाड़ी को भी रोक लिया।
कार्रवाई की बड़ी बातें: पुलिस महकमे में हड़कंप
गिरफ्तारी: डायल 112 की गाड़ी में मौजूद दो चालकों (ड्राइवर्स) को एसटीएफ ने मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया, जो तस्करों के साथ सीधे संपर्क में थे। इसके साथ ही पिकअप वैन के तस्करों को भी दबोच लिया गया।
सस्पेंशन की गाज: इस शर्मनाक मामले के सामने आते ही पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। डायल 112 की गाड़ी पर तैनात ड्यूटी अधिकारी और बासोपट्टी के थाना प्रभारी (थानेदार) को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है।
जांच का दायरा: गिरफ्तार ड्राइवरों और तस्करों से कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब इस पूरे रैकेट के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज (पूरे नेटवर्क) को खंगाल रही है।
सुरक्षा एजेंसियों और SSB पर उठे गंभीर सवाल
इस खुलासे ने सीमा सुरक्षा और स्थानीय पुलिसिंग की पोल खोलकर रख दी है। भारत-नेपाल बॉर्डर पर SSB (सशस्त्र सीमा बल) के जवान तैनात रहते हैं, जहाँ आम जनता के पास से 10-15 किलो सामान मिलने पर भी कड़ी चेकिंग होती है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि:
"आखिर इतनी भारी-भरकम 4 क्विंटल गांजे से लदी पिकअप गाड़ी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में कैसे घुस आई? क्या इस खेल में बॉर्डर पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की भी मिलीभगत थी?"
एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का अंदेशा
जिस तरह से तस्करों ने सीधे पुलिस व्यवस्था (डायल 112) को ही अपने साथ मिला लिया, उससे साफ है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं है। इसमें नेपाल से लेकर बिहार के कई जिलों तक फैले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट और कुछ 'सफेदपोशों' (प्रभावशाली लोगों) के शामिल होने की पूरी आशंका है। फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद से पूरे मधुबनी और वैशाली के तस्करों में हड़कंप मचा हुआ है और मामले की उच्च स्तरीय जांच जारी है।
