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अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका पर सवाल
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दर्दनाक मौत : अमेरिकी नौसेना पर मदद न करने और शव को बंधक बनाने का संगीन आरोप

ओमान के दुकुम बंदरगाह के निकट कमर्शियल जहाज MT Celestial Sea पर तैनात भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते मौत हो गई। जहाज के कप्तान और क्रू के अनुसार 8 जून से लगातार अमेरिकी नौसेना से चिकित्सा सहायता मांगी गई, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

कीर्तिमान न्यूज
14 Jun 2026, 05:49 PM
नई दिल्ली

ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े एक कमर्शियल जहाज 'एमटी सेलेस्टियल सी' पर सवार भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन की गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण मौत हो गई है। ओमान में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर इस दुखद घटना की पुष्टि की है। लेकिन इस मौत के पीछे एक ऐसा कूटनीतिक और मानवीय संकट खड़ा हो गया है जिसने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका पर बड़े सवाल उठा दिए हैं।

'स्पुतनिक इंडिया' की एक खोजी रिपोर्ट और जहाज के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, जब भारतीय नाविक की जान संकट में थी, तब अमेरिकी नौसेना से बार-बार मदद की गुहार लगाई गई थी, जिसे कथित तौर पर पूरी तरह अनसुना कर दिया गया। इतना ही नहीं, अब यह चौंकाने वाला दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना मृतक नाविक के शव को जहाज से बाहर निकालने (Medical Evacuation) की इजाजत भी नहीं दे रही है।

कैप्टन की चिट्ठी से खुला राज

जहाज के कप्तान राजेंद्र यादव और अन्य क्रू सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित एक आधिकारिक पत्र सामने आया है, जो 8 जून से 11 जून 2026 के बीच समुद्र में घटे उस खौफनाक मंजर की गवाही देता है:

1. शुरुआती लक्षण और पहली अपील (8 जून)

  • दोपहर 12:00 बजे द्वितीय अधिकारी निशांत उर्थनाथन ने पेट में अस्वस्थता और लगातार उल्टी होने की शिकायत की।

  • जहाज के प्रबंधन ने तुरंत कंपनी कार्यालय को सूचित किया और वीएचएफ चैनल 16 (VHF Channel 16) के माध्यम से क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नौसेना को आपातकालीन कॉल कर मरीज की स्थिति बताई।

  • शाम तक अमेरिकी नौसेना से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। निशांत की उल्टी की तीव्रता बढ़ गई और वे हर 5-10 मिनट में उल्टी करने लगे। उन्हें 'ओन्डेट-एमडी' (Ondet-MD) की दवा दी गई, जिससे रात में थोड़ा आराम मिला।

2. स्थिति में अस्थायी सुधार (9 जून)

  • इस दिन उल्टी तो बंद हो गई, लेकिन निशांत के पेट और पूरे शरीर में असहनीय दर्द था। क्रू उन्हें तरल दाल, चावल, ओआरएस (ORS) और पानी दे रहा था।

3. बढ़ता संकट और लगातार अनदेखी (10 जून)

  • जहाज के कैप्टन ने डॉक्टर की सलाह पर दवाइयां जारी रखीं।

  • कंपनी और अमेरिकी नौसेना को वीएचएफ चैनल 16 के माध्यम से लगातार तटवर्ती सहायता (Shore Support) के लिए संदेश भेजे गए, लेकिन अमेरिकी नौसेना की तरफ से कोई मानवीय प्रतिक्रिया या चिकित्सा सहायता नहीं भेजी गई।

4. अंतिम क्षण और दुकुम बंदरगाह की ओर प्रस्थान (11 जून)

  • सुबह 06:00 बजे: निशांत ने खाना-पानी पूरी तरह बंद कर दिया। हालत बेहद नाजुक हो गई।

  • दोपहर 12:00 बजे: कोई मदद न मिलती देख कैप्टन ने जहाज का लंगर उठाया और ओमान के सबसे नजदीकी बंदरगाह 'दुकुम' की ओर बढ़ना शुरू किया। दुकुम पोर्ट कंट्रोल को आपातकालीन चिकित्सा निकासी के लिए सूचित किया गया।

  • दोपहर 03:00 बजे: निशांत पूरी तरह बेहोश हो गए।

  • शाम 05:00 बजे से 06:00 बजे: शाम 5 बजे निशांत की सांसें रुक गईं। क्रू ने उन्हें सीपीआर (CPR) दिया और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। कुछ देर नब्ज चली, लेकिन आखिरकार शाम 6:00 बजे उनकी नब्ज भी पूरी तरह बंद हो गई और डॉक्टरों की अनुपस्थिति में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

शव को निकालने में आ रही कूटनीतिक बाधाएं

जहाज के कप्तान राजेंद्र यादव के अनुसार, निशांत की मौत के बाद भी संकट खत्म नहीं हुआ है। कंपनी लगातार संपर्क में है, लेकिन स्थिति इतनी जटिल हो चुकी है कि हेलीकॉप्टर के जरिए भी शव का रेस्क्यू नहीं हो पा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना की कुछ पाबंदियों या अनुमति न मिलने के कारण शव जहाज पर ही फंसा हुआ है।

भारतीय दूतावास का रुख: ओमान में भारतीय दूतावास इस मामले को स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ उच्च स्तर पर उठा रहा है ताकि कानूनी और राजनयिक प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा कर मृतक निशांत उर्थनाथन के पार्थिव शरीर को उनके शोकाकुल परिवार तक भारत वापस भेजा जा सके। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुद्र में इस तरह की चिकित्सा अनदेखी को लेकर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

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