खरीफ सीजन के बीच प्रदेश के किसानों पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक होने से किसान बैंक, सहकारी समितियों और चॉइस सेंटरों के चक्कर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शासन ने एग्री स्टैक किसान पंजीयन को अनिवार्य कर नई चुनौती खड़ी कर दी है।
दोनों प्रक्रियाओं की अंतिम तिथि 31 जुलाई होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। इस बार सबसे बड़ा बदलाव संयुक्त कृषि परिवारों के लिए किया गया है। पहले किसी एक भूमि खाते या ऋण पुस्तिका में दर्ज परिवार के मुखिया (नंबरदार किसान) का पंजीयन ही पर्याप्त माना जाता था, लेकिन अब यह व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है। शासन के नए निर्देशों के अनुसार खाते में दर्ज प्रत्येक हिस्सेदार को अलग-अलग एग्री स्टैक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा।
हर हिस्सेदार का अलग पंजीयन होगा जरूरी
यदि किसी भूमि खाते में पांच भाइयों या अन्य हिस्सेदारों के नाम दर्ज हैं, तो अब केवल एक व्यक्ति के पंजीयन से काम नहीं चलेगा। सभी पांचों किसानों को अलग-अलग पंजीयन कराना होगा। तभी भविष्य में धान खरीदी और कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि 31 जुलाई तक एग्री स्टैक पंजीयन नहीं कराने वाले किसानों को आगामी धान खरीदी में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा कृषि विभाग की विभिन्न अनुदान एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी प्रभावित हो सकता है।पंजीयन के लिए किन दस्तावेजों की होगी जरूरत
पंजीयन कराने के लिए किसानों को आधार कार्ड, अद्यतन ऋण पुस्तिका (बी-1 एवं खसरा) और आधार से लिंक मोबाइल नंबर के साथ नजदीकी चॉइस सेंटर, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) या प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में जाना होगा। मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी के सत्यापन के बाद ही पंजीयन प्रक्रिया पूरी होगी। खेती-किसानी के सबसे व्यस्त समय में एक साथ फसल बीमा और एग्री स्टैक पंजीयन की अनिवार्यता ने ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।
किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए शासन को पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि कोई भी पात्र किसान केवल तकनीकी कारणों से धान बेचने या सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए।