पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और दुखद खबर सामने आ रही है। राज्य के पूर्व डिप्टी स्पीकर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता आशीष बनर्जी का शव बीरभूम स्थित पार्टी दफ्तर में फंदे से लटकता हुआ पाया गया है। रविवार सुबह जैसे ही यह खबर बाहर आई, पूरे सियासी महकमे में हड़कंप मच गया। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले आशीष बनर्जी की इस संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया है और शव को कब्जे में लेकर तफ्तीश शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिस कमरे में आशीष बनर्जी का शव फंदे से झूलता मिला, वहीं से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया गया है।
मौत के पीछे की वजह आए सामने
फिलहाल, इस सुसाइड नोट में क्या लिखा है, इसका आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया गया है, जिससे घटना का रहस्य और भी गहरा गया है। पुलिस ने मौका-ए-वारदात का बारीकी से मुआयना करने के बाद शव को तुरंत पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है। मामले की गंभीरता और नेता के राजनीतिक कद को देखते हुए प्रशासन ने सभी पहलुओं की गहन जांच शुरू कर दी है, ताकि मौत के पीछे की असली वजह सामने आ सके। आशीष बनर्जी कोई आम नेता नहीं थे, वे बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस का एक मजबूत स्तंभ थे।
रामपुरहाट में पांच बार लगातार जीत का बनाया था रिकॉर्ड
रामपुरहाट विधानसभा सीट पर उनकी पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 2001, 2006, 2011, 2016 और 2021 में लगातार पांच बार इस सीट से शानदार जीत दर्ज की थी। हालांकि, इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों में सियासी हवा का रुख बदला और इस अजेय नेता को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार ध्रुबा साहा के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा। चुनावी हार के बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। इसी बीच, बीते जून महीने में आशीष बनर्जी ने टीएमसी की बीरभूम ज़िला कोर कमेटी के चेयरमैन पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था।संगठन से जुड़े रहने की कही थी बात
हालांकि, उस वक्त उन्होंने स्पष्ट किया था कि वे पार्टी के एक आम कार्यकर्ता के तौर पर संगठन से जुड़े रहेंगे। गौरतलब है कि हालिया विधानसभा चुनावों में बीरभूम जिले के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। जहां 2021 में टीएमसी ने जिले की 11 में से 10 सीटों पर एकतरफा कब्जा जमाया था और बीजेपी महज एक सीट पर सिमट गई थी, वहीं इस बार के चुनाव में बीजेपी ने जोरदार वापसी करते हुए 11 में से 6 सीटों पर जीत का परचम लहराया है।
मौत के बाद राजनीतिक गलियारों में शोक
इस बदलते सियासी माहौल, हालिया चुनावी हार, इस्तीफे और बंद कमरे में मिले सुसाइड नोट के बीच क्या कोई सीधा कनेक्शन है? यह तो पुलिस की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा। फिलहाल, इस दिग्गज नेता की यूं अचानक मौत से बंगाल के राजनीतिक गलियारों में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।


