बिहार कांग्रेस के भीतर की रार अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। पार्टी की अंदरूनी कलह और गुटबाजी अब किसी से छिपी नहीं है, क्योंकि पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह ने अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और प्रभारियों के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद अखिलेश सिंह का गुस्सा फूट पड़ा है और उन्होंने हार का पूरा ठीकरा पार्टी के आलाकमान और चुनाव प्रभारियों के सिर पर फोड़ दिया है। उनके इस बागी रुख के बाद बिहार के सियासी गलियारों में भूचाल मच गया है।
अगर मैं अध्यक्ष होता तो पार्टी का यह हाल न होता
अखिलेश सिंह ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि चुनाव से ठीक पहले उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाना पार्टी की सबसे बड़ी भूल थी, जिसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा। उन्होंने सीधे तौर पर कहा:
"यह लोग बिहार आए और सबसे पहले मुझे अध्यक्ष पद से हटा दिया। बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महज 6 सीटों पर सिमट कर रह गई। अगर मैं उस वक्त अध्यक्ष पद पर होता, तो कांग्रेस का ऐसा खराब प्रदर्शन कभी नहीं होता। जब मैं जिम्मेदारी संभाल रहा था, तब मैंने पार्टी को 4 सांसद (3 लोकसभा और 1 राज्यसभा) जिताकर दिए थे।"
भरे मंच पर सह-प्रभारी को लताड़ा
अखिलेश सिंह का गुस्सा यहीं नहीं रुका। उन्होंने बिना नाम लिए बिहार कांग्रेस के मौजूदा प्रभारी अल्लावरु पर तीखा हमला बोला। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि मंच पर खुद सह-प्रभारी शाहनवाज आलम मौजूद थे, और अखिलेश सिंह ने उनके सामने ही प्रभारियों की राजनीतिक समझ को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को बिहार का प्रभारी बना दिया गया है जिनका राजनीति से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है और न ही उन्हें जमीनी हकीकत की कोई जानकारी है।राहुल गांधी से सीधी बात और जातिगत समीकरण का हवाला
समीकरणों की बात करते हुए अखिलेश सिंह ने अपनी ही जाति (भूमिहार) का पत्ता भी खेला। उन्होंने कहा कि इस बार बिहार विधानसभा में 40% सवर्ण विधायक जीतकर आए हैं, जिनमें से अकेले भूमिहार जाति के 27 विधायक हैं।
अपनी बात को वजन देने के लिए उन्होंने यह भी साफ किया कि वह चुप बैठने वाले नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम और बिहार के मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर उन्होंने खुद राहुल गांधी से बात की है और उनसे सीधे पूछा है कि 'अब बिहार में आगे क्या करना है?'
राजनीतिक गलियारों में मची हलचल
अखिलेश सिंह के इस तीखे बयान और सीधे हमले ने यह साफ कर दिया है कि बिहार कांग्रेस में 'ऑल इज वेल' बिल्कुल नहीं है। चुनाव हारने के बाद नेताओं की आपसी खींचतान अब उस मोड़ पर आ चुकी है जहां से पार्टी को एकजुट रखना आलाकमान के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अखिलेश सिंह के इन तेवरों से आने वाले दिनों में बिहार कांग्रेस के भीतर एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव या फिर बड़ी बगावत देखने को मिल सकती है।