Bilaspur DEO Office: जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय बिलासपुर में चार साल पहले हुई कर्मचारियों की पदोन्नति का मामला एक बार फिर गरमा गया है। वर्ष 2021 में सहायक ग्रेड-3 से सहायक ग्रेड-2 के पद पर प्रमोट किए गए 30 कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पदोन्नत कर्मचारियों को उनके मूल कैडर के बजाय ग्रंथपाल (लाइब्रेरियन) संवर्ग के बजट से वेतन बांटा जा रहा है। शिक्षक संजय कुमार पाण्डेय ने इस पूरे मामले की शिकायत लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को भेजी है। उन्होंने पदोन्नति आदेशों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने, अवैध रूप से बांटे गए वेतन की रिकवरी करने और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
पसंदीदा कर्मचारियों को पहुंचाया लाभ
शिकायतकर्ता के अनुसार, 17 जून 2021 को हुई इस विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। आरोप है कि पदोन्नति देते समय वरिष्ठता सूची, अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता और आरक्षण रोस्टर के तय पैमानों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने पसंदीदा कर्मचारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इस मामले का सबसे गंभीर पहलू बजट का गलत इस्तेमाल है।
कर्मचारियों की सैलरी रिक्त पदों के बजट से
शिकायत में दावा किया गया है कि सहायक ग्रेड-2 बने इन 30 कर्मचारियों की सैलरी पिछले कई सालों से ग्रंथपाल संवर्ग के स्वीकृत और रिक्त पदों के बजट से निकाली जा रही है। वित्तीय नियमों के मुताबिक, किसी एक कैडर के आवंटित बजट का इस्तेमाल दूसरे कैडर के कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए नहीं किया जा सकता। अगर यह आरोप जांच में सही पाया जाता है, तो यह सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग और गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी का मामला बनता है।पुरानी जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि
मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह पहली बार नहीं है जब यह मुद्दा उठा है। इस गड़बड़ी की विस्तृत जांच लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) स्तर पर पहले भी कराई जा चुकी है। सूत्र बताते हैं कि पुरानी जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी थी और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी तय कर दी गई थी। इसके बावजूद, फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई और किसी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्वतंत्र ऑडिट और रिकवरी की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि:
वर्ष 2021 की पदोन्नति से जुड़ी डीपीसी कार्रवाई, सेवा पुस्तिकाओं (Service Books) और वित्तीय दस्तावेजों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
शासन को साल-दर-साल हुए वित्तीय नुकसान का सटीक आकलन कर दोषी अधिकारियों से इस राशि की वसूली की जाए।
अवैध रूप से की गई पदोन्नतियों को तुरंत निरस्त कर पुरानी जांच रिपोर्ट को दबाने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई हो।
अब देखना यह होगा कि नई शिकायत के बाद शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी इस दबाई गई फाइल पर क्या रुख अपनाते हैं और दोषियों पर कब तक कार्रवाई होती है।

