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Facilities for farmers at procurement centers (Image Source: Keertiman Media)
Facilities for farmers at procurement centers (Image Source: Keertiman Media)
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Paddy Procurement: धान खरीदी की तैयारियां तेज, न लगेगी लंबी कतार, न तौल में होगी गड़बड़ी, किसानों के लिए बने 35 कड़े नियम

Paddy Procurement: बिलासपुर में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी के लिए किसानों की सुविधा और पारदर्शिता पर जोर दिया जा रहा है। उपार्जन केंद्रों पर 35 बिंदुओं की चेकलिस्ट के तहत इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे, नमी मापक यंत्र, पेयजल, छायादार शेड और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने की व्यवस्था है। ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से गिरदावरी रकबे और किसान के टोकन का मिलान किया जाएगा।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 19 Oct 2026, 07:49 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Paddy Procurement: बिलासपुर खरीफ विपणन वर्ष के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान बेचने वाले किसानों के लिए इस बार की व्यवस्था काफी राहत भरी रहने वाली है। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अन्नदाताओं की मेहनत का पूरा दाम दिलाना और उपार्जन केंद्रों में पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इस बार न तो किसानों को घंटों धूप में खड़े होकर टोकन या तौल का इंतजार करना पड़ेगा और न ही तौल में किसी तरह की हेराफेरी की गुंजाइश रहेगी।

नजदीकी केंद्रों से समय और भाड़ा दोनों बचेगा 

छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखते हुए इस बार उपार्जन केंद्रों का दायरा बढ़ाया गया है। पहले दूर-दराज के गांवों से धान लेकर आने वाले किसानों का पूरा दिन बीत जाता था और ट्रैक्टर का भारी-भरकम भाड़ा भी जेब पर भारी पड़ता था। अब पास में ही केंद्र उपलब्ध होने से परिवहन खर्च में सीधी कटौती होगी और किसान उसी दिन अपनी उपज बेचकर आसानी से घर लौट सकेंगे।

35 बिंदुओं पर तैयार की गई चेकलिस्ट, पारदर्शी होगी पूरी प्रक्रिया

किसानों की सहूलियत और सुरक्षा के लिए शासन ने उपार्जन केंद्रों पर 35 बिंदुओं का कड़ा पैमाना लागू किया है। इसके तहत सभी केंद्रों पर आधारभूत सुविधाएं और निष्पक्ष तौल व्यवस्था अनिवार्य की गई है:

  • सटीक तौल और नमी परीक्षण: तौल में गड़बड़ी रोकने के लिए केवल नापतौल विभाग से सत्यापित इलेक्ट्रॉनिक कांटों का ही उपयोग होगा। इसके साथ ही धान की सही गुणवत्ता जांचने के लिए नमी मापक यंत्रों को क्रियाशील रखा जा रहा है।

  • बिचौलियों पर नकेल: पीसीएसएपी (PCSAP) सॉफ्टवेयर के माध्यम से गिरदावरी रकबे और किसान के टोकन का रियल-टाइम ऑनलाइन मिलान किया जाएगा। इससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म होगी और भुगतान में कोई अड़चन नहीं आएगी।

उपार्जन केंद्रों में किसानों को मिलेंगी ये प्रमुख सुविधाएं

  1. छायादार शेड व बैठक व्यवस्था: तेज धूप और मौसम की मार से बचाने के लिए केंद्रों में पर्याप्त शेड और बैठने की जगह बनाई गई है।

  2. पीने का पानी व प्राथमिक चिकित्सा: केंद्रों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के साथ-साथ किसी भी आपात स्थिति के लिए फर्स्ट-एड (प्राथमिक उपचार) किट उपलब्ध रहेगी।

  3. डिजिटल एंट्री से त्वरित काम: रियल-टाइम सॉफ्टवेयर एंट्री के कारण किसानों को अनिश्चितकालीन इंतजार और कतारों से मुक्ति मिलेगी।

  4. धान की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: बारिश से बचाव के लिए पक्के ऊंचे चबूतरे बनाए गए हैं और पर्याप्त तिरपाल की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी स्थिति में धान खराब न हो।

प्रशासन के इस कदम से जिले के हजारों किसानों को पारदर्शी, सुरक्षित और झंझट-मुक्त वातावरण में अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा।

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