हाथी के कुचलने से रिक्शा चालक की मौत के मामले में वन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे के बाद विभाग ने हाथी के संचालक और उसके मालिक को नोटिस जारी कर सभी जरूरी दस्तावेज निर्धारित समय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिनसे यह संकेत मिला है कि हाथी को इंदौर लाने से पहले आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर वन विभाग अब पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि हाथी को इंदौर शहर में प्रवेश दिलाने के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।
बिना वैध अनुमति इंदौर पहुंचा हाथी
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार हाथी का पंजीयन उज्जैन स्थित निर्मोही अखाड़ा के नाम पर दर्ज है, जबकि उसका लाइसेंस संदीप निर्मोही के नाम से जारी किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि हाथी हाल ही में हैदराबाद में एक फिल्म की शूटिंग में शामिल हुआ था, जिसके बाद उसे इंदौर लाया गया। हालांकि, शहर में उसके प्रवेश से संबंधित वैध अनुमति के दस्तावेज जांच के दौरान उपलब्ध नहीं कराए जा सके। यही कारण है कि अब वन विभाग पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अनुमति प्रक्रिया और नियमों के पालन की विस्तृत जांच कर रहा है।
संरक्षण अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई
वन विभाग का कहना है कि दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संचालक और हाथी के मालिक के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम तथा अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर वन्यजीवों के उपयोग और उनके परिवहन के लिए निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य है। यदि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।26 जुलाई को हुआ था दर्दनाक हादसा
विभाग यह भी जांच कर रहा है कि हाथी के परिवहन और शहर में आवाजाही के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। गौरतलब है कि 26 जुलाई को इंदौर के राजनगर क्षेत्र में एक हाथी अचानक बेकाबू हो गया था। इस दौरान उसने सड़क से गुजर रहे एक रिक्शा चालक को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी और स्थानीय लोगों में भारी दहशत फैल गई थी। हादसे के बाद लोगों ने सार्वजनिक स्थानों पर हाथियों की आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे।
जांच का दायरा बढ़ा
वन विभाग अब इस पूरे मामले की कई पहलुओं से जांच कर रहा है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि हाथी को बिना वैध अनुमति इंदौर कैसे लाया गया, उसके परिवहन के दौरान किन नियमों का पालन किया गया और स्थानीय प्रशासन को इसकी पूर्व जानकारी दी गई थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि हादसे के समय सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई। विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।