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बारिश से लबालब छत्तीसगढ़ के बांध
बारिश से लबालब छत्तीसगढ़ के बांध
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छत्तीसगढ़ के बांधों में उफान, कई डैम 100 फीसदी फुल, हसदेव बांगो के 9 गेट खोले

छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश से बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। प्रदेश के जलाशयों में औसत जलभंडारण 87 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कोडार, मनियारी और खारंग बांध पूरी तरह भर चुके हैं, जबकि हसदेव बांगो में बढ़ते जलस्तर के कारण गेट खोले गए हैं।

कीर्तिमान न्यूज | अप्पू धीवर
प्रकाशित: 18 Aug 2026, 02:52 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 01:41 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ में पिछले एक पखवाड़े से हो रही झमाझम बारिश ने प्रदेश के किसानों और आम लोगों को बड़ी राहत दी है। लगातार हो रही इस बारिश से राज्य के छोटे-बड़े और मध्यम जलाशय पूरी तरह लबालब हो चुके हैं। स्थिति यह है कि कई बड़े बांध अपनी 100 फीसदी क्षमता तक भर गए हैं, जिसके चलते उनके गेट खोलने पड़े हैं। अगस्त के शुरुआती 15 दिनों में ही प्रदेश के बांधों में जलस्तर औसतन 8 फीसदी उछलकर 87 प्रतिशत पर पहुंच गया है। पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश का असर साफ नजर आ रहा है। 

दबाव बढ़ने से खोलने पड़े गेट 

अगर बड़े बांधों की बात करें, तो मुंगेली जिले का मनियारी, बिलासपुर का खारंग और महासमुंद जिले का कोडार डैम पूरी तरह (100%) भर चुके हैं। खासकर कोडार डैम का कई सालों बाद इस स्तर तक पहुंचना एक शानदार खबर है। वहीं, कोरबा के हसदेव बांगो (Hasdeo Bango Dam) बांध में पानी का दबाव बढ़ने से उसके 9 गेट खोलने पड़े हैं।

पिछले दो सालों का रिकॉर्ड टूटा

आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल बांधों में जलभंडारण पिछले दो वर्षों के मुकाबले काफी शानदार है:

  • इस वर्ष (16 अगस्त तक): 87%

  • वर्ष 2024 (16 अगस्त तक): 80%

  • वर्ष 2025 (16 अगस्त तक): 74% इन आंकड़ों से साफ है कि इस बार मानसून राज्य के जलाशयों पर पूरी तरह मेहरबान है।

बांधों में हो गया भरपूर पानी 

सूखे की कगार पर पहुंच चुके बांधों में भी अब भरपूर पानी आ गया है। राजनांदगांव का मोंगरा बैराज इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 22 जुलाई तक यह बैराज पूरी तरह सूखा (0%) था, लेकिन अब यह उछाल मारकर 78% तक भर चुका है। धमतरी के रविशंकर जलाशय में 85% पानी आ चुका है। वहीं, गंगरेल और इसके लिंकिंग डैम में पिछले 15 दिनों के भीतर 18% की बढ़ोतरी हुई है और जलस्तर 88% के करीब पहुंच गया है। हालांकि, कांकेर के मायना जलाशय में पानी अभी भी अपेक्षाकृत कम (33%) है। बिलासपुर और राजनांदगांव के कई अन्य बांध भी पूरी तरह फुल हो चुके हैं।

गेटे से पानी छूटने का दृश्य 
एक नजर में: 31 जुलाई से 16 अगस्त के बीच जलस्तर का ग्राफ

  • मिनीमाता बांगो: 83.35% से बढ़कर 94.19% हुआ।

  • गंगरेल: 67.82% से बढ़कर 85% तक पहुंचा।

  • तांदुला: 66.58% से बढ़कर 74.99% दर्ज।

  • कोडार बांध: 87.90% से बढ़कर 100% (फुल) हुआ।

  • मनियारी और खारंग: दोनों जलाशय 100% पर बरकरार हैं।

  • मुरूमसिल्ली: 84.33% से बढ़कर 88.98% हुआ।

  • अरपा भैंसाझार: 25.14% से बढ़कर 44.96% दर्ज किया गया।

जलाशयों के भरने पर विभाग खुश 

सिकासार (76.74%), दुधावा (76.76%) और सोंदूर (80.16%) जैसे कुछ बांधों में 31 जुलाई की तुलना में जलस्तर थोड़ा कम हुआ है। इसका मुख्य कारण यह है कि ये बांध पहले ही 95% से ज्यादा भर चुके थे, जिसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर इनसे भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया। केलो बांध में भी जलस्तर 40.45% से घटकर 34.33% दर्ज किया गया है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बांधों की इस स्थिति पर खुशी जताते हुए कहा है कि सितंबर तक इन जलाशयों में जलभंडारण और भी बेहतर होने की उम्मीद है। बांधों के इस तरह लबालब होने से न सिर्फ मौजूदा फसलों को अमृत मिलेगा, बल्कि आगामी वर्ष के लिए भी पेयजल और सिंचाई के पानी की कोई किल्लत नहीं रहेगी।
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