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आसमान अभेद्य करेगा इंडोनेशिया
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ड्रैगन की दादागिरी पर ब्रेक : भारत की ब्रह्मोस के बाद अब दक्षिण कोरियाई चियोंगुंग-II से आसमान अभेद्य करेगा इंडोनेशिया

दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच इंडोनेशिया अपनी रक्षा क्षमता को तेजी से मजबूत कर रहा है। जकार्ता ने दक्षिण कोरिया के Cheongung-II (KM-SAM Block II) एयर डिफेंस सिस्टम के लिए Letter of Intent जारी किया है, जबकि भारत की BrahMos सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।

कीर्तिमान न्यूज
11 Jun 2026, 05:29 PM
जकार्ता

दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में चीन की बढ़ती आक्रामकता और विस्तारवादी नीति ने पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। इस खतरे को भांपते हुए इंडोनेशिया अब अपनी सैन्य ताकत को युद्धस्तर पर अपग्रेड कर रहा है। अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए इंडोनेशिया ने एक साथ दो मोर्चों पर बड़ी तैयारी की है—पहला, भारत से घातक ब्रह्मोस (Brahmos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की खरीद और दूसरा, दक्षिण कोरिया के अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम चियोंगुंग-II (Cheongung-II) को अपने बेड़े में शामिल करने को हरी झंडी।

चीन के काल 'केएम-एसएएम ब्लॉक II' की एंट्री

इंडोनेशिया ने दक्षिण कोरियाई MSAM-II 'चियोंगुंग-II' (KM-SAM Block II) सिस्टम को खरीदने का मन बना लिया है। यह एक मध्यम-दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) प्रणाली है।

इसे खास तौर पर चीनी क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों, स्टील्थ लड़ाकू विमानों और आत्मघाती ड्रोनों को हवा में ही नेस्तनाबूद करने के लिए डिजाइन किया गया है।

ताजा अपडेट (मई 2026): इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय की लॉजिस्टिक्स एजेंसी ने हाल ही में (18 मई 2026 को) चियोंगुंग-II का निर्माण करने वाली कंपनी LIG Nex1 की सहायक इकाई 'LIG डिफेंस एंड एयरोस्पेस' को औपचारिक रूप से लेटर ऑफ इंट्रेस्ट (LoI) जारी कर दिया है।

हालांकि, यह पत्र अभी गैर-बाध्यकारी (Non-binding) है और अंतिम सौदा फाइनेंसिंग की मंजूरी, पेमेंट गेटवे और परफॉर्मेंस गारंटी पर निर्भर करेगा। लेकिन इसने साफ कर दिया है कि इंडोनेशिया अपनी हवाई सुरक्षा की कमियों को दूर करने के लिए बेहद गंभीर है।

इस महाडील में इंडोनेशिया को क्या-क्या मिलेगा?

यह केवल मिसाइल खरीदने का सौदा नहीं है, बल्कि इंडोनेशिया इसके जरिए अपनी घरेलू रक्षा प्रणाली को भी मजबूत कर रहा है। इस पूरे 'प्रस्तावित पैकेज' में शामिल हैं:

  • एंगेजमेंट कंट्रोल स्टेशन और मल्टी-फंक्शन रडार।

  • वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) और ट्रांसपोर्टर-इरेक्टर-लॉन्चर।

  • मिसाइल ट्रांसलोडर वाहन और स्पेयर पार्ट्स की बड़ी इन्वेंट्री।

  • टेक्नोलॉजी-ट्रांसफर (ToT): इसके तहत इंडोनेशिया के घरेलू रक्षा-औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत किया जाएगा ताकि भविष्य में वह खुद ऐसे हथियारों का रखरखाव कर सके।

आखिर चीन से इतना क्यों डरा है इंडोनेशिया?

इंडोनेशिया 17,000 से अधिक द्वीपों में फैला हुआ देश है। भौगोलिक बनावट के कारण यहाँ रडार कवरेज और फाइटर जेट्स का तालमेल बिठाना बेहद जटिल काम है। इसी 'कमजोरी' का फायदा चीनी नौसेना और वायुसेना उठाना चाहती है।

प्रमुख चिंताएंसंभावित सैन्य और आर्थिक परिणाम
चोकपॉइंट्स पर खतरामलक्का और सुंडा जलडमरूमध्य जैसे वैश्विक व्यापार मार्ग चीन के निशाने पर हैं।
होर्मुज जैसी स्थिति का डरइंडोनेशिया को डर है कि चीन इन समुद्री रास्तों को ब्लॉक कर सकता है।
आर्थिक नाकेबंदीअगर ये रास्ते बंद हुए, तो पूरे इंडो-पैसिफिक का समुद्री व्यापार नेटवर्क ठप हो जाएगा।

इसीलिए इंडोनेशिया एक मल्टी-लेयर्ड इंटीग्रेटेड एयर-एंड-मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहा है, जहां भारत की ब्रह्मोस मिसाइलें समुद्र में जहाजों को निशाना बनाएंगी, वहीं चियोंगुंग-II आसमान से आने वाले खतरों को रोकेगा।

क्यों खास है 'चियोंगुंग-II' मिसाइल सिस्टम? (At a Glance)

  • 96% सक्सेस रेट: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में युद्ध के दौरान इसने ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों के खिलाफ 96% का अचूक इंटरसेप्शन रेट दर्ज किया है, जिससे यह दुनिया के सबसे भरोसेमंद सिस्टम्स में शामिल हो गया है।

  • 360-डिग्री सुरक्षा: इसमें अत्याधुनिक मल्टी-फंक्शन रडार और 'कोल्ड-लॉन्च' तकनीक है, जो मिसाइल को वर्टिकल दागती है और वह हवा में ही दुश्मन की दिशा में मुड़ जाती है। यानी चारों दिशाओं से एक साथ आने वाले हमलों का काल।

  • कम कीमत, दमदार मार: अमेरिकी 'पैट्रियट (Patriot)' मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तुलना में यह काफी किफायती और मेंटेनेंस में आसान है, यही वजह है कि दक्षिण-पूर्वी एशिया के देश इसके दीवाने हो रहे हैं।

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