विदेशी मेहमानों के आने-जाने वाले रास्तों, ठहरने वाले होटलों, एयरपोर्ट और आयोजन स्थल के आसपास सुरक्षा का विशेष घेरा बनाया जाएगा। दिल्ली पुलिस के साथ NSG, खुफिया एजेंसियां, NDRF और अन्य सुरक्षा बलों की टीमें भी तैनात रहेंगी। पांच प्रमुख तकनीकों से होगी सुरक्षा की निगरानी BRICS Summit के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में पांच प्रमुख तकनीकी प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाएगा। इनका मकसद संदिग्ध गतिविधियों का समय रहते पता लगाना और किसी भी खतरे पर तुरंत कार्रवाई करना है।
थ्री-डी हवाई सुरक्षा
1. थ्री-डी हवाई सुरक्षा और एंटी-ड्रोन सिस्टम भारत मंडपम और पूरे लुटियंस जोन में हवाई निगरानी को बेहद सख्त रखा जाएगा। इसके लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम, रडार और इलेक्ट्रॉनिक जैमर्स लगाए जाएंगे। इनकी मदद से अनधिकृत ड्रोन की पहचान कर उसके सिग्नल को निष्क्रिय करने की क्षमता होगी। हवाई क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर सुरक्षा एजेंसियों की तत्काल नजर रहेगी। आयोजन स्थल के आसपास ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
2. VIP काफिलों की GPS से रियल-टाइम ट्रैकिंग विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और VVIP मेहमानों के काफिले में शामिल सुरक्षा वाहनों में रियल-टाइम GPS ट्रैकिंग सिस्टम लगाया जाएगा। कंट्रोल रूम से इन वाहनों की लोकेशन, रफ्तार और निर्धारित रूट पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। किसी भी स्थिति में काफिले की लोकेशन में बदलाव या निर्धारित मार्ग से हटने की स्थिति में संबंधित टीमों को तुरंत जानकारी मिल सकेगी।
3. CBRN खतरे से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा कवच सम्मेलन के दौरान केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर यानी CBRN खतरों से निपटने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
NDRF और सेना की प्रशिक्षित टीमें अत्याधुनिक उपकरणों और हैजमैट वाहनों के साथ तैयार रहेंगी। किसी भी तरह की संदिग्ध रासायनिक या अन्य खतरनाक सामग्री मिलने पर इन टीमों को तत्काल कार्रवाई के लिए सक्रिय किया जा सकेगा।
4. AI कैमरों से 24 घंटे निगरानी BRICS Summit के दौरान एयरपोर्ट, होटल, भारत मंडपम और VVIP मेहमानों के आवागमन वाले रास्तों पर हाई-डेफिनिशन कैमरों से निगरानी की जाएगी।
AI आधारित कैमरे संदिग्ध गतिविधियों, असामान्य भीड़ और लावारिस वस्तुओं जैसी गतिविधियों को पहचानकर कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजने में मदद करेंगे। इससे सुरक्षा एजेंसियों को संभावित खतरे की पहचान और प्रतिक्रिया में तेजी मिलेगी।
5. बायोमीट्रिक और फेशियल रिकग्निशन से प्रवेश आयोजन स्थल के प्रवेश द्वारों पर बायोमीट्रिक और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
सम्मेलन से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य अधिकृत लोगों की पहले से पहचान और सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद ही निर्धारित क्षेत्रों में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
अनधिकृत प्रवेश पर रोक
इस व्यवस्था का उद्देश्य अनधिकृत लोगों के प्रवेश की संभावना को कम करना है। UN महासचिव एंतोनियो गुतारेस के भी शामिल होने की संभावना इस वर्ष भारत 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता और मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन 11 से 13 सितंबर तक दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। सम्मेलन के दौरान BRICS सदस्य देशों और साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच महत्वपूर्ण बैठकों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं।इस वर्ष BRICS Summit की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रखी गई है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन में BRICS सदस्य और साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्षों के अलावा आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी होगी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के भी शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आने की संभावना जताई गई है। चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा भारत भारत BRICS के संस्थापक सदस्यों में शामिल है।
VVIP रूट पर कड़ी निगरानी
इससे पहले भारत वर्ष 2012, 2016 और 2021 में BRICS की अध्यक्षता कर चुका है। अब 1 जनवरी 2026 से भारत ने चौथी बार समूह की अध्यक्षता संभाली है। खास बात यह है कि वर्ष 2026 में BRICS अपनी स्थापना की 20वीं वर्षगांठ भी मना रहा है। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में होने वाला 18वां BRICS Summit कूटनीतिक और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजधानी में होने वाले इस बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सम्मेलन स्थल से लेकर VVIP रूट तक हर स्तर पर निगरानी रखने की तैयारी में हैं। आधुनिक तकनीक और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय के जरिए सम्मेलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद रखने की कोशिश की जा रही है।
