भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के नेता बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न और मानसिक शोषण के आरोपों से अदालत ने उन्हें और सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी कर दिया है। अदालत ने यह फैसला पर्याप्त सबूत न होने के आधार पर सुनाया है। सुनवाई पूरी होने और करीब साढ़े तीन साल के लंबे कानूनी घटनाक्रम के बाद यह निर्णय आया है।
वकील के मुताबिक, इस मामले का विस्तृत लिखित आदेश भी जल्द ही कोर्ट की तरफ से जारी कर दिया जाएगा। फैसले के तुरंत बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद थे। उन्होंने कहा, "जब यह मामला सामने आया था, तभी मैंने साफ कहा था कि अगर मुझ पर लगा एक भी आरोप सही साबित हो जाए तो मैं फांसी पर चढ़ने को तैयार हूं।
आरोपों लगने के बाद लोकसभा टिकट कटा
आज अदालत ने मुझे बाइज्जत बरी करके यह साबित कर दिया है कि सच क्या था।" आगे के रुख पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जो हो गया सो हो गया, अब वह इस मामले को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं। गोंडा से 6 बार सांसद रह चुके बृजभूषण शरण सिंह का नाम पूर्वांचल की राजनीति में काफी बड़ा माना जाता है। हालांकि, महिला पहलवानों के गंभीर आरोपों और लगातार चले धरना-प्रदर्शनों के बाद पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया था। बाद में पार्टी ने उनकी जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को मैदान में उतारा था, जो वर्तमान में गोंडा से सांसद हैं।
आदेश राजनीतिक कारणों से अहम
फैसला आने से ठीक पहले राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे बृजभूषण सिंह काफी शांत नजर आ रहे थे। कोर्ट परिसर में जब उनसे प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि फैसला अदालत के हाथ में है और वह न्यायपालिका के निर्णय को स्वीकार करेंगे। जुलाई 2023 से जमानत पर चल रहे बृजभूषण सिंह के लिए यह अदालती आदेश कानूनी और राजनीतिक दोनों लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।