मध्य प्रदेश की सियासत और कॉर्पोरेट जगत से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। कटनी के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक के पारिवारिक बिजनेस साम्राज्य में करीब 1,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोपी कारोबारी महेंद्र गोयनका को आखिरकार कोलकाता पुलिस ने दिल्ली से दबोच लिया है।
अदालत में पेशी के बाद पुलिस ने आरोपी गोयनका को 10 दिनों की रिमांड पर लिया है। अब पुलिस इस पूरे सिंडिकेट, फर्जी दस्तावेजों और पैसों के लेनदेन की परतों को खंगालने में जुट गई है। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश के मुताबिक, रायपुर का रहने वाला महेंद्र गोयनका कभी विधायक संजय पाठक के परिवार की साख वाली कंपनी 'यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' में एक ऊंचे और जिम्मेदार पद (प्रमुख प्रबंधकीय पद) पर तैनात था। इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया।
कंपनी को करोड़ों का नुकसान
आरोप है कि गोयनका ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और जाली हस्ताक्षरों (फोर्जरी) के सहारे पाठक परिवार की कई बहुमूल्य कंपनियों पर अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश की। सिर्फ इतना ही नहीं, उसने कंपनी के माल को औने-पौने दामों और अवैध तरीके से बाजार में बेचा, जिससे कंपनी को करोड़ों रुपये का भारी-भरकम नुकसान हुआ। इस धोखाधड़ी को लेकर कोलकाता में आईपीसी की गंभीर धाराओं (420, 120-बी, 467, 468 और 471) के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद पुलिस ने यह बड़ी कार्रवाई की है।
जमानत याचिकाएं कोर्ट से खारिज
महेंद्र गोयनका की मुश्किलें सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, मध्य प्रदेश के कटनी जिले में भी जालसाजी और धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मुकदमे इस पर और इसके साथी निदेशकों पर दर्ज हैं। हालत यह है कि इस केस से जुड़े कुछ सह-आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) से भी खारिज हो चुकी हैं और कई आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।संदिग्ध लेनदेन जांच के दायरे में
इसके अलावा, 9 मई 2025 को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की मुंबई पीठ ने भी एक फैसले के दौरान महेंद्र गोयनका और उसकी पत्नी मीनू गोयनका की वित्तीय कारगुजारियों पर तीखी टिप्पणियां की थीं। गोयनका की एक अन्य कंपनी 'निसर्ग इस्पात' के जरिए किए गए संदिग्ध लेनदेन भी अब जांच के दायरे में आ चुके हैं। गोयनका की इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद मध्य प्रदेश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अंदरखाने चर्चा है कि गोयनका को राज्य के कुछ बेहद रसूखदार लोगों और बड़े अफसरों का सीधा संरक्षण हासिल था।
सूत्रों का दावा
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह लग रहा है कि महेंद्र गोयनका कई बड़े आईएएस (IAS) अधिकारियों के काले धन को सफेद (मनी लॉन्ड्रिंग) करने के खेल में शामिल था। यही वजह है कि अब जांच का दायरा केवल एक कारोबारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें शामिल पूरा प्रशासनिक और व्यापारिक नेटवर्क बेनकाब हो सकता है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन आने वाले दिनों में कई बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।