CG Coal Crisis: देश को कोयला देने वाले छत्तीसगढ़ में ही संकट, HTPS में सिर्फ 3 दिन का स्टॉक
CG Coal Crisis: छत्तीसगढ़ के HTPS और कोटा पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक घट गया है। बारिश के कारण SECL से कम आवक के बीच बिजली उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ा है।
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कीर्तिमान डेस्क | लक्ष्मी साहू
30 Aug 2026, 07:13 PM
कोरबा
CG Coal Crisis: देश के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में शामिल छत्तीसगढ़ में इन दिनों कोयले की कमी का मुद्दा सामने आया है। कोरबा के दर्री स्थित हसदेव ताप विद्युत संयंत्र (HTPS) में कोयले का स्टॉक काफी कम बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्लांट में जहां बारिश के मौसम में करीब 5 लाख मीट्रिक टन कोयला स्टॉक होना चाहिए, वहीं फिलहाल लगभग तीन दिन के संचालन के लिए ही कोयला बचा है।
HTPS में प्रतिदिन करीब 20 हजार मीट्रिक टन कोयले की जरूरत बताई जा रही है। दूसरी ओर बारिश के कारण साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की खदानों से प्लांट तक कोयले की आवक प्रभावित हुई है। वर्तमान में प्रतिदिन करीब 3 से 4 हजार मीट्रिक टन कोयला ही पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
बारिश का असर: पावर प्लांटों में कोयले की कमी
210 मेगावाट की एक यूनिट बंद
कोयले की कमी का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ने लगा है। HTPS की 210 मेगावाट क्षमता वाली एक यूनिट पहले ही बंद किए जाने की बात सामने आई है। यदि कोयले की आपूर्ति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो प्लांट की अन्य यूनिटों के संचालन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस बीच संयंत्रों में कोयले की कमी को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि सरकारी संयंत्रों में संकट की स्थिति पैदा कर निजीकरण का रास्ता तैयार किया जा रहा है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कोटा पावर प्लांट में भी घटा कोयला स्टॉक
कोयले की कमी का असर केवल कोरबा तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। कोटा क्षेत्र के सुपर थर्मल पावर प्लांट में भी कोयले का स्टॉक घटने की जानकारी सामने आई है। छत्तीसगढ़ और सिंगरौली क्षेत्र की कोयला खदानों में बारिश के चलते पानी भरने से खदानों से कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
कोटा प्लांट में करीब 1240 मेगावाट क्षमता की इकाइयों के संचालन के लिए रोजाना लगभग 12 से 15 हजार मीट्रिक टन कोयले की आवश्यकता बताई गई है। फिलहाल यहां करीब पांच दिन के संचालन के लिए कोयला स्टॉक में होने की जानकारी सामने आई है।
बारिश बनी कोयला आपूर्ति में बाधा
मानसून के दौरान कोयला खदानों में बारिश और जलभराव के कारण उत्पादन तथा परिवहन प्रभावित होना बिजली संयंत्रों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में पावर प्लांटों में पर्याप्त कोयला स्टॉक बनाए रखना जरूरी होता है। वर्तमान स्थिति में कोयले की आवक और उपलब्ध स्टॉक पर नजर बनी हुई है।
देश के कोयला उत्पादन में छत्तीसगढ़ की बड़ी हिस्सेदारी
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य से हर साल बड़ी मात्रा में कोयले का उत्पादन होता है और देश के कुल कोयला उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब 18 से 20 प्रतिशत के आसपास बताई जाती है। ऐसे में राज्य के ही बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी की खबर चिंता बढ़ाने वाली है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि SECL की खदानों से कोयले की आपूर्ति कब सामान्य होती है और बिजली संयंत्रों में पर्याप्त स्टॉक कब तक बहाल किया जाता है। आपूर्ति में जल्द सुधार नहीं होने पर बिजली उत्पादन पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर निगाहें बनी हुई हैं।