CG News: गरियाबंद जिले के बिन्द्रानवागढ़-सातधार मार्ग पर लगातार बारिश के चलते प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बना पुराना रपटा पुल क्षतिग्रस्त होकर ढह गया है। करीब 18 साल पुराने इस पुल के टूटने से क्षेत्र के दर्जनों गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों को आने-जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं और रोजाना आवागमन करने वाले ग्रामीणों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था नहीं होने के कारण कई लोग जान जोखिम में डालकर टूटे हुए पुल को पार करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में यह रास्ता और भी खतरनाक हो गया है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर, एंबुलेंस पहुंचना हुआ मुश्किल
पुल टूटने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सामने आ रही है। मार्ग बंद होने के कारण बड़े वाहन और एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
खासकर गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार मरीजों को खाट या पैदल ले जाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
क्षेत्र के ग्रामीण मनबोध, सुरेश कुमार, रामेश्वर, वीरेन्द्र कुमार और सूरज कुमार ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग को इस समस्या से अवगत कराया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जाए या अस्थायी रपटे का निर्माण कराया जाए, ताकि लोगों का आवागमन दोबारा शुरू हो सके।

निर्माण एजेंसी को लेकर अधिकारियों और सरपंच के दावे अलग-अलग
क्षतिग्रस्त पुल का निर्माण किस एजेंसी द्वारा कराया गया था, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क विभाग गरियाबंद के कार्यपालन अभियंता (EE) राहुल चंद्राकर ने बताया कि बारिश के कारण रपटा धंस गया है, जिसके चलते आवागमन बंद है। उन्होंने कहा कि पुल के दोनों ओर जिला प्रशासन की ओर से चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। निर्माण विभाग या ग्राम पंचायत द्वारा कराया गया था, इसकी जानकारी फाइल देखने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
50 लाख रुपए की लागत से बना था पुल, गुणवत्ता पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार इस रपटा पुल का निर्माण करीब 50 लाख रुपए की लागत से किया गया था। पुल के अचानक क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते मरम्मत और देखरेख नहीं होने के कारण पुल कमजोर होता गया और बारिश के दबाव में ढह गया। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।

सरपंच का दावा- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क विभाग ने कराया था निर्माण
ग्राम पंचायत पतोरा के सरपंच कृष्णकुमार नाग ने दावा किया है कि इस रपटा पुल का निर्माण करीब 18 साल पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क विभाग द्वारा कराया गया था। उन्होंने बताया कि पुल पहले से ही धीरे-धीरे खराब हो रहा था और इसकी मरम्मत के लिए कई बार शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार बारिश के कारण आखिरकार पुल धंस गया, जिससे पाराटोला क्षेत्र के हजारों लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों ने की बड़े पुल निर्माण की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए यहां स्थायी रूप से बड़े पुल का निर्माण किया जाना चाहिए। फिलहाल लोगों की परेशानी को देखते हुए प्रशासन से तत्काल अस्थायी व्यवस्था करने की मांग की गई है, ताकि बारिश के दौरान आवागमन और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।

