CG News: बेमौसम बारिश और तेज अंधड़ ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल को नुकसान पहुंचने से किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। दीपावली के त्योहार के बीच फसल खराब होने से कई किसानों के सामने आर्थिक संकट की आशंका खड़ी हो गई है। अपनी परेशानी शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए कवर्धा के किसानों ने अनूठा तरीका अपनाया। उन्होंने तबला, ढोलक और हारमोनियम की धुन पर लोकगीत गाकर फसल नुकसान का दर्द बयां किया और सरकार से मुआवजे की मांग की।
सालभर की मेहनत पर मौसम की मार
किसानों के लिए धान की फसल केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि पूरे परिवार की जरूरतों को पूरा करने का सहारा भी होती है। फसल तैयार होने के बाद उसकी बिक्री से मिलने वाली रकम से बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और शादी-ब्याह जैसे जरूरी काम पूरे किए जाते हैं। ऐसे में कटाई से पहले मौसम बिगड़ने और फसल को नुकसान पहुंचने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बताया जा रहा है कि अर्नब चक्रवात के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी फसलों को प्रभावित किया है। धान के साथ सरसों की फसल को भी नुकसान पहुंचने की चिंता जताई जा रही है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक स्थिति का पता सर्वे के बाद ही चल सकेगा।
लोकगीतों में छलका किसानों का दर्द
अपनी बात अधिकारियों और सरकार तक पहुंचाने के लिए कवर्धा के किसानों ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का सहारा लिया। तबला, ढोलक और हारमोनियम की संगत में गीत गाकर उन्होंने अपनी परेशानी सामने रखी। लोकगीतों के माध्यम से किसानों ने बताया कि फसल पर आई आफत ने उनकी आर्थिक योजनाओं को प्रभावित कर दिया है। किसानों का कहना है कि खेती में पूरे साल मेहनत करने के बाद जब फसल तैयार होती है, तब प्राकृतिक आपदा से नुकसान होना परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ता है।फसल नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने की मांग
प्रभावित किसानों ने शासन-प्रशासन से जल्द फसल नुकसान का आकलन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि खेतों का सर्वे कर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए और पात्र किसानों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके।
दीपावली के बीच किसानों को राहत का इंतजार
दीपावली खुशियों और नई उम्मीदों का त्योहार है, लेकिन फसल खराब होने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिन परिवारों को इस समय फसल से अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, वे अब नुकसान की भरपाई को लेकर परेशान हैं। अब किसानों की निगाहें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई होगी, फसल नुकसान का आकलन किया जाएगा और प्रभावित परिवारों को राहत मिल सकेगी।






