क्यों पड़ी विभागीय TET की जरूरत?
परीक्षा का स्वरूप और प्रमुख प्रस्ताव
- आसान पासिंग मार्क्स: सेवारत शिक्षकों के लिए आयोजित होने वाली इस विभागीय परीक्षा में न्यूनतम उत्तीर्णांक 33% रखने का प्रस्ताव दिया गया है।
पास के परीक्षा केंद्र: शिक्षकों की सुविधा के लिए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों (Government Higher Secondary Schools) को ही परीक्षा केंद्र बनाने का सुझाव दिया गया है।
दूसरे राज्यों का पैटर्न: मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में शिक्षकों के लिए अपनाए गए मॉडलों का हवाला दिए जाने पर शिक्षा मंत्री ने आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ में भी मध्य प्रदेश की तर्ज पर ही परीक्षा प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
पदोन्नति, पुरानी पेंशन और वेतन विसंगति पर मंथन
- पदोन्नति के रास्ते साफ: पुरानी DPC की वेटिंग लिस्ट के आधार पर प्राचार्यों के रिक्त पदों को भरने, E-संवर्ग के व्याख्याताओं को प्रमोशन देने और प्रधान पाठकों (MS/PS) की वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति का हल निकालने पर सहमति बनी।
प्रथम नियुक्ति से सेवा गणना: शिक्षकों की पहली जॉइनिंग डेट से ही सेवा अवधि की गिनती कर पुरानी पेंशन (OPS) का पूरा लाभ देने और LB संवर्ग को देय सभी सुविधाएं दिलाने पर बातचीत हुई।
सेंट्रल पे-स्केल की मांग: शिक्षक संवर्ग में जारी वेतन विसंगतियों को दूर कर केंद्रीय वेतनमान लागू करने की मांग पर शिक्षा मंत्री ने मामला वित्त विभाग (Finance Department) को भेजने का भरोसा दिलाया है।
बातचीत रंग लाई, फिलहाल टला बड़ा आंदोलन
शिक्षा मंत्री के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद शिक्षक संघर्ष मोर्चा के रुख में नरमी आई है। संगठन के प्रांतीय नेताओं (संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे, केदार जैन और संजय तिवारी) ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है। शिक्षक नेताओं का कहना है कि सेवा सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। सरकार से स्पष्ट आश्वासन मिलने के बाद फिलहाल उग्र आंदोलन के रुख को धीमा कर दिया गया है। हालांकि, मांगों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए संगठन जन प्रतिनिधियों, सांसदों और विधायकों से संवाद का सिलसिला जारी रखेगा।मुख्य बातें:
किसे मिलेगा फायदा: TET की अनिवार्यता से प्रभावित प्रदेश के सभी सेवारत शिक्षक।
क्या हुआ फैसला: सामान्य TET के स्थान पर विशेष विभागीय TET कराने पर सहमति।
कितनी बार होगी परीक्षा: वर्ष में 3 बार।
आयोजक संस्था: छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग।
न्यूनतम पासिंग मार्क्स (प्रस्तावित): 33% अंक।
मुख्य उद्देश्य: सुप्रीम कोर्ट के मानकों का पालन करते हुए सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षित करना।