छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही थी। अब ED की एंट्री के बाद मामले की जांच और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। इस कार्रवाई को घोटाले से जुड़े आर्थिक पहलुओं की जांच में अहम कदम माना जा रहा है।
गिरफ्तारी के बाद ED टामन सोनवानी को आज विशेष अदालत में पेश करेगी। एजेंसी अदालत से पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान भर्ती प्रक्रिया, वित्तीय लेन-देन और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसी इस मामले से जुड़े दस्तावेजों और आर्थिक लेन-देन की भी गहन पड़ताल कर रही है।
क्या है पूरा CGPSC भर्ती घोटाला
CGPSC भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद तब शुरू हुआ, जब वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित परीक्षाओं और साक्षात्कारों के परिणाम सामने आए। इन भर्तियों में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी सहित कई प्रतिष्ठित प्रशासनिक पद शामिल थे। आरोप लगे कि चयन सूची में तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी के रिश्तेदारों के अलावा कुछ प्रभावशाली और वीआईपी लोगों के करीबी परिजनों को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाया गया। इन आरोपों के बाद अभ्यर्थियों ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
CBI पहले ही कर चुकी है कार्रवाई
इन आरोपों के आधार पर CBI ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान एजेंसी ने CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी और बजरंग पावर के डायरेक्टर श्रवण कुमार गोयल को पहले ही गिरफ्तार किया था। CBI लगातार दस्तावेजों, भर्ती प्रक्रिया और चयन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अब ED भी इस मामले में मनी ट्रेल और आर्थिक अनियमितताओं की अलग से जांच कर रही है।सरकार की अधिसूचना के बाद दर्ज हुआ केस
CBI ने यह मामला 9 जुलाई 2024 को दर्ज किया था। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 16 फरवरी और 10 अप्रैल 2024 को जारी अधिसूचनाओं के आधार पर की गई। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों ने वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित परीक्षाओं और साक्षात्कारों में अपने पुत्र, पुत्री, रिश्तेदारों और प्रभावशाली लोगों से जुड़े अभ्यर्थियों को चयनित कराने में भूमिका निभाई।
भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए थे लाखों अभ्यर्थी
CBI की जांच के अनुसार, केवल वर्ष 2021 की भर्ती प्रक्रिया में ही 1,29,206 अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा में हिस्सा लिया था। इनमें से 2,548 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हुए। आगे 509 अभ्यर्थी साक्षात्कार चरण तक पहुंचे और अंततः 170 उम्मीदवारों का विभिन्न प्रशासनिक और पुलिस पदों पर चयन किया गया। इसी चयन प्रक्रिया को लेकर सबसे अधिक सवाल उठे और कई अभ्यर्थियों ने निष्पक्षता पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं।जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना
ED की इस कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भर्ती अनियमितताओं के पीछे किसी प्रकार का आर्थिक लाभ, लेन-देन या संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था। आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच के आधार पर इस मामले में अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल CBI और ED दोनों एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही हैं।