देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए आने वाले साल काफी अहम माने जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर किए गए निवेश का असर अब कंपनी की वित्तीय स्थिति में दिखाई देने लगा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अब कंपनी भारी निवेश के चरण से निकलकर मजबूत कैश फ्लो और बेहतर रिटर्न वाले दौर में प्रवेश कर सकती है। इससे शेयरधारकों के लिए भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।
FY26-FY28 में मजबूत कैश फ्लो की उम्मीद
ब्रोकरेज फर्मों के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 से 2028 के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज करीब 90,000 करोड़ रुपये का फ्री कैश फ्लो पैदा कर सकती है। इसकी मुख्य वजह यह मानी जा रही है कि कंपनी का बड़े पूंजीगत निवेश (कैपेक्स) का दौर अब धीमा पड़ रहा है, जबकि विभिन्न कारोबारों से आय में बढ़ोतरी की संभावना बन रही है।
तीन साल तक किया बड़े स्तर पर निवेश
पिछले तीन वर्षों के दौरान रिलायंस ने टेलीकॉम, रिटेल, पेट्रोकेमिकल्स, न्यू एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया। इस दौरान कंपनी का फ्री कैश फ्लो दबाव में रहा, लेकिन अब इन परियोजनाओं से बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
ब्रोकरेज फर्मों ने जताया भरोसा
ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि रिलायंस का कैपेक्स साइकिल अब अपने उच्चतम स्तर को पार कर चुका है। ऐसे में अगले तीन वित्त वर्षों में कंपनी का फ्री कैश फ्लो करीब 90,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में और मजबूत होने की संभावना है।
कर्ज घटाने में मिलेगी मदद
विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ता कैश फ्लो कंपनी के कर्ज को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2028 तक रिलायंस का कंसोलिडेटेड लेवरेज लगभग 0.7 गुना तक घट सकता है। जून तिमाही के अंत में कंपनी का नेट डेट करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।
जेपी मॉर्गन ने भी जताए सकारात्मक संकेत
जेपी मॉर्गन के विश्लेषक संजय मुकीम के अनुसार, रिलायंस पिछले तीन वर्षों से नेगेटिव फ्री कैश फ्लो की स्थिति में काम कर रही थी क्योंकि कंपनी लगातार बड़े निवेश कर रही थी। अब जैसे-जैसे पूंजीगत खर्च कम होगा और नई परियोजनाओं से कमाई बढ़ेगी, कंपनी के लिए पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो हासिल करना आसान होगा। इससे आने वाले वर्षों में रिलायंस की वित्तीय मजबूती और निवेशकों का भरोसा दोनों बढ़ सकते हैं।