विदेश में अच्छी नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना लेकर जाने वाले लोगों के लिए मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक को ओमान में मस्जिद का इमाम बनाने का झांसा देकर भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसकी जिंदगी मुश्किलों से भर गई। आरोप है कि युवक से इमाम की नौकरी कराने के बजाय जबरन सफाई और घरेलू काम करवाए गए। पीड़ित युवक ने बताया कि उससे रोजाना 30 से 40 कमरों के टॉयलेट साफ करवाए जाते थे, बर्तन धुलवाए जाते थे और लगातार 14 से 15 घंटे तक काम कराया जाता था। इतना ही नहीं, काम के बदले उसे न तो वेतन दिया गया और न ही खाने-पीने के लिए पर्याप्त पैसे मिले। युवक ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि विदेश जाने का सपना उसके लिए मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का कारण बन गया।
नौकरी का झांसा, 2 लाख की ठगी
यह पूरा मामला रायसेन जिले के दीवानगंज निवासी मोहम्मद फैजान से जुड़ा है। फैजान के मुताबिक, जनवरी 2026 में उसकी मुलाकात एक एजेंट से हुई थी। एजेंट ने उसे भरोसा दिलाया कि ओमान की एक मस्जिद में उसे इमाम यानी नमाज पढ़ाने की नौकरी दिलाई जाएगी। अच्छी नौकरी और विदेश में कमाई की उम्मीद में फैजान ने एजेंट की बात पर विश्वास कर लिया।
फैजान ने बताया कि शुरुआत में एजेंट ने उससे 20 हजार रुपये लिए। इसके बाद मेडिकल और अन्य प्रक्रिया के नाम पर 1 लाख 80 हजार रुपये और मांगे गए। परिवार ने किसी तरह करीब 2 लाख रुपये की व्यवस्था की और नौकरी की उम्मीद में फैजान को 4 मई 2026 को ओमान की राजधानी मस्कट भेज दिया गया।
मिनिस्ट्री ऑफिस में कराई सफाई
फैजान ने बताया कि ओमान पहुंचने के बाद उसे मस्जिद में इमाम की नौकरी नहीं दी गई। इसके बजाय उसे एक मिनिस्ट्री ऑफिस में काम करने के लिए भेज दिया गया। वहां उससे ऐसा काम कराया गया, जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था। उसका कहना है कि रोजाना सुबह से देर रात तक उससे सफाई का काम कराया जाता था। 30 से 40 कमरों की सफाई, टॉयलेट साफ करना और बर्तन धोना उसकी दिनचर्या बन गई थी। कई बार लगातार 14 से 15 घंटे काम करने के बाद भी उसे आराम नहीं मिलता था। फैजान के मुताबिक, सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि इतनी मेहनत के बावजूद उसे वेतन नहीं दिया गया। खाने के लिए भी पैसे नहीं मिलते थे, जिसके कारण कई बार उसे भूखे पेट रहना पड़ा। धीरे-धीरे उसकी आर्थिक और मानसिक स्थिति खराब होती चली गई।
मदद नहीं मिलने पर टूट गया था युवक
फैजान ने बताया कि उसने कई बार एजेंट और संबंधित कंपनी से मदद की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उसकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। लगातार हो रही प्रताड़ना और आर्थिक परेशानी के कारण वह पूरी तरह टूट गया था। उसने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब वह इतना परेशान हो गया था कि उसने अपनी जिंदगी खत्म करने तक के बारे में सोच लिया था। परिवार से दूर, बिना पैसे और बिना किसी सहारे के विदेश में फंसे रहना उसके लिए बेहद मुश्किल दौर था। हालांकि, इसी मुश्किल समय में कुछ भारतीयों ने उसकी मदद की और उसे नई उम्मीद मिली।
भारतीयों ने बढ़ाया मदद का हाथ
फैजान के मुताबिक, मस्कट में रहने वाले नवाब भाई नाम के एक भारतीय ने उसकी आर्थिक मदद की और उसे जरूरी खर्च के लिए पैसे दिए। वहीं, मोहम्मद खलील अहमद नाम के एक अन्य व्यक्ति ने करीब डेढ़ महीने तक उसे अपने घर में रहने की जगह दी। इन लोगों की मदद से फैजान को कुछ राहत मिली और इसके बाद भारतीय दूतावास तक उसकी बात पहुंची। दूतावास के हस्तक्षेप के बाद उसे उस मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला गया और सुरक्षित भारत वापस भेजने की व्यवस्था की गई। करीब ढाई महीने तक मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलने के बाद फैजान अपने घर लौट सका। अब वह लोगों से अपील कर रहा है कि विदेश जाने से पहले नौकरी और एजेंट की पूरी जांच जरूर करें, ताकि किसी और को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।