छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय कर्मचारियों के लिए जुलाई 2026 से एक नई सुविधा शुरू की है। इसके तहत कर्मचारी अब ई-कोष (e-Kosh) पोर्टल के माध्यम से अपने वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण (Short Term Credit) प्राप्त कर सकेंगे। यह योजना आकस्मिक चिकित्सा, बच्चों की शिक्षा और अन्य जरूरी पारिवारिक जरूरतों के लिए शुरू की गई है। खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पेपरलेस रखी गई है।
राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य कर्मचारियों को अचानक आने वाली आर्थिक जरूरतों के समय आसान वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। इससे कर्मचारियों को निजी साहूकारों से कर्ज लेने या बैंकों के अधिक ब्याज वाले ऋण पर निर्भर रहने की जरूरत कम होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शासकीय सेवकों के हित में इस योजना की शुरुआत की है।
ई-कोष प्रणाली से जुड़ी पूरी व्यवस्था
वित्त विभाग द्वारा संचालित यह योजना ई-कोष पोर्टल के साथ एकीकृत की गई है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित और आसान बनाया गया है। कर्मचारी अब ऋण के लिए आवेदन करने से लेकर राशि प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर सकेंगे। इस योजना की खास बात यह है कि इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। कर्मचारी द्वारा लिए गए ऋण की राशि की वसूली हर महीने वेतन से तय किस्तों के रूप में की जाएगी। इससे भुगतान प्रक्रिया भी आसान और व्यवस्थित रहेगी।
ई-कोष से ऑनलाइन मिलेगा ऋण
योजना का लाभ लेने के लिए कर्मचारियों को कार्यालयों के चक्कर लगाने या लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। कर्मचारी ई-कोष पोर्टल के ‘एम्प्लॉयी कॉर्नर’ में जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के दौरान ई-केवाईसी, डिजिटल प्रमाणीकरण और सहमति जैसी सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन पूरी होंगी। ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र कर्मचारियों को स्वीकृति के अनुसार ऋण राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। वित्त विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का भी विशेष ध्यान रखा गया है।चिकित्सा, शिक्षा और पारिवारिक जरूरतों में मिलेगी मदद
सरकार की इस योजना से कर्मचारियों को अचानक आने वाली आर्थिक परेशानियों में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। चिकित्सा खर्च, बच्चों की पढ़ाई या अन्य जरूरी पारिवारिक कार्यों के लिए कर्मचारी आसानी से वित्तीय सहायता ले सकेंगे। राज्य सरकार का मानना है कि इस योजना से शासकीय कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और वे बिना आर्थिक तनाव के अपने दायित्वों का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकेंगे। डिजिटल माध्यम से शुरू की गई यह सुविधा कर्मचारियों के लिए सरल, सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प साबित हो सकती है।