Chhattisgarh Culture: महासमुंद में आयोजित राज्योत्सव 2026 में शासकीय डीएमएस उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं, रीति-रिवाजों और लोकगीतों पर आधारित नृत्य प्रस्तुत कर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया। इस कार्यक्रम में कुल 21 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। उनकी प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग सामाजिक और पारंपरिक अवसरों से जुड़े लोकगीत शामिल रहे। जन्म के अवसर पर गाए जाने वाले सोहर गीत से लेकर नाचा-गम्मत की नजरिया गीत शैली तक को विद्यार्थियों ने अपने नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया।
सोहर से लेकर भड़ौनी और चदैनी गीतों ने मोहा मन
विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ में बच्चे के जन्म और छठ्ठी नामकरण संस्कार के अवसर पर गाए जाने वाले पारंपरिक सोहर गीत की प्रस्तुति दी। इसके अलावा नाचा-गम्मत विधा पर आधारित नजरिया गीत और बारात के स्वागत के समय गाए जाने वाले भड़ौनी गीत को भी शामिल किया गया। वहीं, लोरिक-चंदा की प्रेमगाथा से जुड़े प्रसिद्ध चदैनी गीत और राजा भरथरी की गाथा पर आधारित भरथरी गीत ने भी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की झलक दिखाई।
पंडवानी और जनजातीय गीत रहे आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाने वाली पंडवानी परंपरा से जुड़े गीत की प्रस्तुति भी दी गई। इसके साथ ही सांवरा जनजाति और सपेरा घुमंतू समुदाय की लोकपरंपरा से जुड़े गीत 'सांप वाला आहे तुहर गांव म' को भी प्रस्तुत किया गया, जो दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा।हिरेंद्र कुमार साहू के निर्देशन में तैयार हुई प्रस्तुति
इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का निर्देशन विद्यालय के व्यायाम शिक्षक एवं विकासखंड क्रीड़ा प्रभारी हिरेंद्र कुमार साहू ने किया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया।
विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने दी बधाई
विद्यार्थियों की प्रस्तुति से प्रभावित होकर विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा सहित कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने विद्यालय की टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। विद्यालय के विद्यार्थियों की इस प्रस्तुति के जरिए छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, पारंपरिक गीत-संगीत और सामाजिक रीति-रिवाजों को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिला। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की दिशा में सराहनीय पहल रहा।







