मध्य प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे लगातार किए जाते हैं, लेकिन कटनी जिले की बहोरीबंद विधानसभा की तस्वीर इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। यहां करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया आधुनिक आईसीयू पिछले करीब एक साल से बंद पड़ा है। कारण सिर्फ इतना है कि इसे चलाने के लिए डॉक्टर, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और टेक्नीशियन की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है। इसका खामियाजा गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है।
आईसीयू बंद होने की वजह से गंभीर मरीजों को इलाज के लिए करीब 70 किलोमीटर दूर कटनी या जबलपुर रेफर किया जाता है। कई बार मरीजों की हालत इतनी गंभीर होती है कि लंबी दूरी तय करने के दौरान ही उनकी जान पर बन आती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आईसीयू समय पर शुरू हो जाता तो कई मरीजों की जान बचाई जा सकती थी।
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
कटनी जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित बहोरीबंद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में क्षेत्रीय विधायक प्रणय पांडे ने अपने दिवंगत पिता की स्मृति में अत्याधुनिक आईसीयू का निर्माण कराया था। भवन पूरी तरह तैयार है। यहां आधुनिक चिकित्सा उपकरण, बेड, ऑक्सीजन सपोर्ट सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके बावजूद आईसीयू का उपयोग नहीं हो पा रहा है और पूरा परिसर पिछले एक साल से बंद पड़ा है।
70 किलोमीटर दूर इलाज की मजबूरी
आईसीयू के भीतर जीवनरक्षक मशीनें और अन्य जरूरी उपकरण अपनी जगह पर रखे हुए हैं, लेकिन लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण उन पर धूल जमने लगी है। जिन संसाधनों का इस्तेमाल गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए होना चाहिए था, वे अब निष्क्रिय पड़े हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी संसाधनों का इस तरह बेकार पड़े रहना चिंता का विषय है।स्टाफ की कमी बनी समस्या
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की नर्सिंग ऑफिसर जानकी हल्दकार ने बताया कि आईसीयू में आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। समस्या केवल प्रशिक्षित स्टाफ और टेक्नीशियन की है। उनका कहना है कि डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होने के कारण पिछले लगभग एक वर्ष से आईसीयू का संचालन शुरू नहीं हो सका है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई इस सुविधा का लाभ तभी मिलेगा, जब यहां आवश्यक स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति कर आईसीयू को जल्द शुरू किया जाए।