विवाद : एमआईसी सदस्य की अमर्यादित टिप्पणी पर भड़के इंजीनियर, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
बिलासपुर नगर निगम में एमआईसी बैठक के दौरान अभियंताओं पर की गई कथित टिप्पणी के विरोध में इंजीनियरों ने मोर्चा खोल दिया है। काली पट्टी बांधकर विरोध जताते हुए उन्होंने सार्वजनिक माफी और सम्मानजनक कार्य वातावरण की मांग की है।
नगर पालिक निगम बिलासपुर की हालिया मेयर-इन-काउंसिल (MIC) बैठक में उठा विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। बैठक के दौरान एमआईसी सदस्य बंधू मौर्य द्वारा निगम के अभियंताओं के लिए इस्तेमाल किए गए ‘मक्कार’ शब्द ने आग में घी डालने का काम किया है। इस अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ पूरा अभियंता संवर्ग एकजुट हो गया है। अधिकारियों ने इस बयान को व्यक्तिगत समीक्षा न मानकर पूरे विभाग की सत्यनिष्ठा और सम्मान पर सीधा प्रहार बताया है। विवाद गहराने के बाद निगम के तमाम इंजीनियरों ने एक साथ आकर महापौर, निगम आयुक्त और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा।
जब तक माफी नहीं तब तक विरोध जारी
अधिकारियों का कहना है कि संवैधानिक और गरिमापूर्ण मंच पर इस तरह की भाषा का प्रयोग न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि दिन-रात मैदानी स्तर पर मुस्तैद रहने वाले कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ने वाला है। एमआईसी सदस्य के इस व्यवहार के विरोध स्वरूप निगम के सभी इंजीनियरों ने काम के दौरान बांह पर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। इंजीनियरों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कदम नहीं उठाए जाते और काम करने के लिए सम्मानजनक माहौल नहीं बनता, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा।
अभियंताओं की प्रमुख मांगें:
सार्वजनिक माफी: विवादित बयान देने वाले एमआईसी सदस्य अपने शब्द वापस लें और पूरे संवर्ग से सार्वजनिक रूप से सामूहिक माफी मांगें।
आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज हो आपत्ति: इस पूरी आपत्ति को आगामी एमआईसी बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) में शामिल किया जाए।
आचार-संहिता लागू हो: भविष्य में किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा अधिकारियों के प्रति ऐसी अभद्र भाषा के इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं।
संसाधनों और स्टाफ की कमी पर ध्यान दें: काम की समीक्षा करते समय बजट, जमीन की उपलब्धता, और कर्मचारियों की कमी जैसे जमीनी हालात को नजरअंदाज न किया जाए। सभी जोनों में खाली पड़े पदों पर जल्द भर्ती हो।
निष्ठा पर सवाल उठाना अनुचित
अधिकारियों ने अपनी व्यथा जताते हुए कहा कि वे केवल निर्माण कार्यों के निरीक्षण तक सीमित नहीं हैं। शहर की जलप्रदाय व्यवस्था, नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण विरोधी अभियान, आपदा प्रबंधन, चुनाव ड्यूटी और नागरिकों की रोजमर्रा की शिकायतों का समाधान उन्हीं के कंधों पर होता है। स्टाफ की कमी और जनप्रतिनिधियों की तरफ से बार-बार बदलने वाले प्रस्तावों के बावजूद वे लगातार जनसेवा में जुटे रहते हैं। ऐसे में उनकी निष्ठा पर सवाल उठाना पूरी तरह अनुचित है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद से नगर निगम के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप का माहौल है और सभी की नजरें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
लेंगे सम्मानजनक फैसला
"हमारा मकसद किसी तरह का विवाद खड़ा करना नहीं है, बल्कि अपने संवर्ग के आत्मसम्मान और कार्यस्थल के बेहतर माहौल को बचाना है। बैठक में जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया, उससे सभी अभियंताओं का मनोबल गिरा है। हमें उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में तुरंत सम्मानजनक फैसला लेगा।" — एसपी साहू, अधीक्षण अभियंता, नगर निगम बिलासपुर