करीब 20,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे रायपुर–विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अभी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ है, लेकिन कुछ हिस्सों में सड़क की सतह पर लंबी दरारें दिखाई देने की तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही पर चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष ने इसे करोड़ों रुपये की परियोजना में लापरवाही का उदाहरण बताते हुए सरकार और निर्माण एजेंसी से जवाब मांगा है।
कांग्रेस ने NHAI पर उठाए गुणवत्ता के सवाल
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक्सप्रेस-वे की कथित दरारों वाली तस्वीरें साझा करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी ने अपने पोस्ट में लिखा कि "विकास का ऐसा नमूना शायद पहली बार देखा होगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा बनाए गए रायपुर–विशाखापट्टनम राष्ट्रीय राजमार्ग की ये तस्वीरें बहुत कुछ बयां कर रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क उद्घाटन से पहले ही जवाब दे गई। फीता कटने से पहले सड़क फट गई, गजब विकास है।" कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी लागत वाली परियोजना में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं होना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों व निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।464 किलोमीटर लंबा सिक्स लेन एक्सप्रेस-वे
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा रायपुर से विशाखापट्टनम तक लगभग 464 किलोमीटर लंबे सिक्स लेन एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और इसे भारतमाला परियोजना के प्रमुख आर्थिक गलियारों में शामिल किया गया है। एक्सप्रेस-वे के शुरू होने के बाद छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच सड़क संपर्क पहले की तुलना में अधिक तेज और सुगम होगा। यह मार्ग रायपुर, धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, कोरापुट और सब्बावरम जैसे महत्वपूर्ण शहरों को सीधे विशाखापट्टनम बंदरगाह से जोड़ेगा। इससे माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आने की उम्मीद है, जिससे उद्योग, व्यापार, कृषि और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा लाभ मिल सकता है।
भारतमाला परियोजना का अहम हिस्सा
यह एक्सप्रेस-वे भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे प्रमुख इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा है। परियोजना के अंतर्गत दो आधुनिक सुरंगों का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा अधिक सुरक्षित और तेज होगी। ग्रीनफील्ड एलाइनमेंट के तहत यह मार्ग छत्तीसगढ़ में 124.611 किलोमीटर, ओडिशा में 262.211 किलोमीटर और आंध्र प्रदेश में 99.629 किलोमीटर तक फैला होगा। छत्तीसगढ़ में इस एक्सप्रेस-वे पर कुल पांच प्रमुख जंक्शन विकसित किए जा रहे हैं, जहां से वाहनों को प्रवेश और निकास की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा परियोजना में क्लोज्ड टोलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसके तहत यात्रियों से केवल उतनी ही दूरी का टोल वसूला जाएगा, जितनी दूरी तक वे एक्सप्रेस-वे का उपयोग करेंगे। यह व्यवस्था यात्रियों के लिए अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक मानी जा रही है।गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल
सड़क पर दरारों की तस्वीरें सामने आने के बाद परियोजना की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, इस मामले में अभी तक NHAI या संबंधित निर्माण एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि तस्वीरों में दिखाई दे रही दरारें किस कारण से आई हैं, उनका वास्तविक स्वरूप क्या है और क्या उन्हें तकनीकी स्तर पर सामान्य माना जा रहा है या फिर निर्माण गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी का मामला है। अब सभी की निगाहें NHAI की प्रतिक्रिया और संभावित तकनीकी जांच पर टिकी हुई हैं।