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स्वास्थ्य मंत्री ने किया चौंकाने वाला खुलासा
स्वास्थ्य मंत्री ने किया चौंकाने वाला खुलासा
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करोड़ का कर्ज : जीवन रक्षक उपकरण ठप, सर्जरी में देरी, संकट के बीच वर्चुअल पोस्टमार्टम और CSR फंड से कायाकल्प की तैयारी

केरल का स्वास्थ्य विभाग गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन के अनुसार विभाग पर कुल 2,493 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसमें 476 करोड़ रुपये दवा कंपनियों और 2,017 करोड़ रुपये करुणा स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (KASP) के तहत देय हैं।

कीर्तिमान न्यूज
10 Jun 2026, 12:43 PM
कोझिकोड

केरल का स्वास्थ्य विभाग इस समय अभूतपूर्व वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि विभाग पर कुल 2,493 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बकाया है। इसमें से 476 करोड़ रुपये सीधे तौर पर दवा कंपनियों के हैं, जबकि 2,017 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा 'करुणा स्वास्थ्य सुरक्षा योजना' (KASP) के तहत बकाया है।

मंत्री ने कड़ी चेतावनी दी है कि इस वित्तीय बोझ के कारण राज्य की पूरी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा रही है। अस्पतालों में जीवन रक्षक उपकरणों की कमी हो गई है और मरीजों की जरूरी सर्जरी लगातार टल रही हैं।

वित्तीय संकट से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था

स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन कोझिकोड में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित ‘कायाकल्पम जनसंपर्क कार्यक्रम’ के राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा:

"जब हमारी नई सरकार ने सत्ता संभाली, तो हमें विरासत में एक भारी वित्तीय देनदारी मिली। भुगतान में अत्यधिक देरी होने के कारण कई प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं (Suppliers) ने अस्पतालों को आवश्यक चिकित्सा उपकरण और जीवन रक्षक दवाओं की डिलीवरी रोक दी है।"

बकाया राशि का मुख्य लेखा-जोखा

मद (Category)बकाया राशि (Amount)
दवा कंपनियों का बकाया₹476 करोड़
करुणा स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (KASP)₹2,017 करोड़
कुल वित्तीय देनदारी₹2,493 करोड़

इस वित्तीय संकट का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, क्योंकि सरकारी संस्थानों में समय पर इलाज और सर्जरी सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

क्या है ‘कायाकल्पम जनसंपर्क कार्यक्रम’?

इस राज्य स्तरीय पहल का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के सामने आ रही जमीनी चुनौतियों का प्रत्यक्ष आकलन करना है। इसके तहत:

  • जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्य कर्मियों और आम जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है।

  • स्वास्थ्य सेवा की खामियों को दूर करने के लिए सामूहिक परामर्श से समाधान खोजे जा रहे हैं।

  • मंत्री ने घोषणा की कि इसके तहत अस्पताल की इमारतों, चिकित्सा उपकरणों, बुनियादी ढांचे की कमियों और डॉक्टरों व विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों की व्यापक समीक्षा की जाएगी।

₹30 करोड़ की लागत से केरल में आएगा 'वर्चुअल पोस्टमार्टम'

इस संकट के बीच सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। विधायक शफी परम्बिल के विशेष अनुरोध पर स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य में वर्चुअल पोस्टमार्टम प्रणाली (Virtual Autopsy System) शुरू करने की हरी झंडी दे दी है।

  • क्या है यह तकनीक? इस तकनीक की मदद से शव को बिना किसी चीर-फाड़ (Surgical cutting) के ही पोस्टमार्टम किया जा सकता है। इसमें मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए CT स्कैन और MRI जैसी अत्यधिक उन्नत इमेजिंग तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

  • लागत और लाभ: इस हाई-टेक सुविधा को शुरू करने में लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इससे राज्य की फोरेंसिक जांच प्रणाली पूरी तरह से डिजिटल और आधुनिक हो जाएगी, जिससे जांच रिपोर्ट भी तेजी से मिल सकेगी।

निजीकरण के आरोपों पर पलटवार

अस्पतालों की खस्ताहाल स्थिति को सुधारने के लिए मंत्री मुरलीधरन ने एक और बड़ा ऐलान किया। सरकार अब सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के आधुनिकीकरण के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड और अन्य वित्तीय स्रोतों का सहारा लेगी।

विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे निजीकरण के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मंत्री ने कड़े शब्दों में कहा:

"सरकारी अस्पतालों में नए भवनों के निर्माण और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए CSR फंड का उपयोग करने का मतलब यह कतई नहीं है कि हम स्वास्थ्य प्रणाली का निजीकरण कर रहे हैं। जो भी संस्थान सरकारी अस्पतालों की मदद के लिए आगे आना चाहते हैं, हम उन्हें प्रोत्साहित करेंगे। निजीकरण के दावे पूरी तरह भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।"

इस विस्तृत समीक्षा और नए कदमों से साफ है कि केरल सरकार एक तरफ जहाँ वित्तीय संकट से उबरने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक तकनीकों के सहारे स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने के लिए प्रयासरत है।

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