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CSMCL घोटाला : आर्थिक अपराध पर हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, अनवर ढेबर की बेल खारिज

छत्तीसगढ़ के चर्चित मैनपावर सप्लाई घोटाले मामले में हाई कोर्ट ने आरोपी अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने आर्थिक अपराधों को गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसे मामले समाज और देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड में ओवरटाइम भुगतान और मैनपावर एजेंसियों के बिल पास कराने के नाम पर बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी हुई। ईडी और एसीबी की जांच में कई अधिकारियों और निजी लोगों की मिलीभगत सामने आई है। कोर्ट ने अनवर ढेबर को मामले का मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 15 May 2026, 11:16 AM · अपडेट: 21 May 2026, 04:33 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित मैनपावर सप्लाई घोटाले मामले में आरोपी अनवर ढेबर को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए आर्थिक अपराधों को बेहद गंभीर श्रेणी का अपराध बताया है। कोर्ट ने अपने सख्त रुख में कहा कि इस तरह के अपराध केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज और देश की आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली सुनियोजित साजिश का हिस्सा होते हैं।

पूरा मामला छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड में कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान में कथित गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कर्मचारियों के नाम पर फर्जी या बढ़े हुए भुगतान दिखाकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया। प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दौरान करीब 28.80 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। इसी के आधार पर मामले ने तूल पकड़ा और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच शुरू की गई।

एसीबी और ईडी की जांच में खुलासे

प्रवर्तन निदेशालय और एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। एसीबी ने धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि अनवर ढेबर ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर निगम के वित्तीय और प्रशासनिक निर्णयों में दखल दिया। आरोप है कि मैनपावर एजेंसियों से रकम वसूली का पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, मैनपावर उपलब्ध कराने वाली निजी एजेंसियों के बिल कथित तौर पर कमीशन दिए बिना पास नहीं किए जाते थे। शुरुआत में यह राशि निश्चित प्रतिशत में ली जाती थी, लेकिन बाद में कथित रूप से इसे बढ़ाकर बिल राशि के एक-तिहाई या उससे अधिक तक पहुंचा दिया गया। इतना ही नहीं, एजेंसियों से चुनावी खर्च और अन्य मदों के नाम पर अतिरिक्त रकम वसूले जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

अधिकारियों और निजी एजेंसियों की मिलीभगत

जांच एजेंसियों का कहना है कि निगम के कुछ तत्कालीन अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल संचालित किया जा रहा था। एजेंसियों से वसूली गई रकम को अलग-अलग माध्यमों से अनवर ढेबर तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। ईडी ने 29 नवंबर 2023 को ट्रैप कार्रवाई के दौरान ईगल हंटर सॉल्यूशंस एजेंसी से जुड़े कर्मचारियों को कथित रिश्वत की रकम के साथ पकड़ा था। इसी कार्रवाई में मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर 23 फरवरी 2026 को अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया गया।

राजनीतिक प्रतिशोध का लगाया आरोप

जमानत याचिका में अनवर ढेबर की ओर से अदालत में दावा किया गया कि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध के तहत फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने कहा कि एक ही मामले में अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर उन्हें लगातार जेल में रखने की कोशिश की जा रही है। हालांकि राज्य सरकार ने अदालत में इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और आरोपी को राहत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि केवल इस आधार पर राहत नहीं दी जा सकती कि आरोपी प्रभावशाली व्यक्ति है या कथित रकम सीधे उसके पास से बरामद नहीं हुई। अदालत ने कहा कि जब मामला सरकारी धन और जनता के पैसों की कथित लूट से जुड़ा हो, तब न्यायालय को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे आर्थिक अपराध सरकारी व्यवस्था में जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं और देश की आर्थिक संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए खारिज हुई जमानत

अदालत ने प्रारंभिक जांच में उपलब्ध दस्तावेजों, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अनवर ढेबर को इस पूरे कथित घोटाले का प्रमुख साजिशकर्ता और लाभार्थी माना। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले को लेकर अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, जबकि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।

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