देश की नई उड़ान : पीएम मोदी ने दिखाई पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी, किराया मात्र ₹5 से शुरू
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जींद-सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल है और इसमें आधुनिक सुरक्षा तकनीक के साथ कई खास सुविधाएं दी गई हैं।
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कीर्तिमान न्यूज
17 Jul 2026, 12:54 PM
सोनीपत
भारतीय रेलवे के इतिहास में आज का दिन एक बड़े मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार को हरियाणा के जींद से देश की पहली ‘हाइड्रोजन ट्रेन’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल ट्रेन जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशनों के बीच दौड़ती नजर आएगी। उद्घाटन के इस ऐतिहासिक मौके पर पीएम मोदी के साथ केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्यपाल प्रो. असीम घोष भी विशेष रूप से मौजूद रहे। आइए जानते हैं तकनीक और सुविधा के लिहाज से देश की इस सबसे अनोखी ट्रेन में क्या कुछ खास है:
रफ्तार, रूट और बेहद सस्ता किराया
यह ट्रेन न सिर्फ पर्यावरण के लिए वरदान है, बल्कि आम जनता की जेब के लिए भी बेहद किफायती साबित होने वाली है।
रूट और स्टेशन: जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन अपने सफर के दौरान कुल 14 स्टेशनों से होकर गुजरेगी।
दूरी और समय: यह ट्रेन 89 किलोमीटर का सफर करीब 2 घंटे में तय करेगी।
रफ्तार: सफर के दौरान इसकी अधिकतम रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी।
किराया: इस ट्रेन की सबसे चौंकाने वाली बात इसका किराया है। इतनी आधुनिक सुविधाओं के बावजूद जींद से सोनीपत तक का सफर तय करने के लिए यात्रियों को मात्र 5 रुपये से लेकर 25 रुपये तक का मामूली किराया देना होगा।
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेनबिना प्रदूषण, हाई-टेक सुरक्षा से लैस हैं कोच
इस हाइड्रोजन ट्रेन को सुरक्षा और आधुनिकता के मामले में ग्लोबल स्टैंडर्ड पर तैयार किया गया है।
कोच की बनावट: ट्रेन में कुल 10 डिब्बे (कोच) लगाए गए हैं। इनमें से 8 कोच यात्रियों के बैठने के लिए हैं, जबकि 2 पावर कार हैं—जो ट्रेन के आगे और पीछे के हिस्सों में जोड़ी गई हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: ट्रेन के भीतर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 'ऑटोमैटिक फायर एक्सटिंग्विशिंग सिस्टम' (स्वचालित आग बुझाने का सिस्टम) लगाया गया है।
सेंसर तकनीक: सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए इसमें 26 हाई-टेक सेंसर फिट किए गए हैं। ये सेंसर हल्के से भी तापमान बदलाव, आग या हाइड्रोजन गैस के रिसाव का तुरंत पता लगा लेते हैं, जिससे हादसा होने की गुंजाइश न के बराबर रह जाती है।
दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हुआ भारत
इस शुरुआत के साथ ही भारत ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त (जीरो एमिशन) होने के कारण यह ट्रेन पर्यावरण को एक प्रतिशत भी नुकसान नहीं पहुंचाएगी। भारत से पहले यह तकनीक सिर्फ जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन जैसे चुनिंदा देशों के पास ही थी, लेकिन अब भारत भी इस एलीट क्लब में शामिल हो गया है।