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गांव की महिलाओं ने संभाली डेयरी की कमान
गांव की महिलाओं ने संभाली डेयरी की कमान
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डेयरी कहानी : गिर-साहीवाल गायों से बदली किस्मत, महिलाओं को मिला रोजगार का सहारा

महासमुंद जिले में दुग्ध उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। ओडीओपी योजना के तहत डेयरी को बढ़ावा मिलने से 15 हजार से अधिक किसान और ग्रामीण परिवार इससे जुड़ चुके हैं। जोरातराई की महिलाओं ने डेयरी व्यवसाय को अपनाकर आर्थिक मजबूती की नई मिसाल पेश की है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 14 Jul 2026, 12:37 PM · अपडेट: 10 Sep 2026, 07:33 AM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
महासमुंद जिला आज छत्तीसगढ़ के प्रमुख दुग्ध उत्पादक क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। जिले में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत दुग्ध उत्पादन को विशेष प्राथमिकता दिए जाने से हजारों किसानों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। वर्तमान में 15 हजार से अधिक किसान एवं ग्रामीण डेयरी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और इसे अपनी आजीविका का प्रमुख साधन बना चुके हैं।

जोरातराई की महिलाओं की नई कहानी

ग्राम जोरातराई की महिला पशुपालक भगवती ध्रुव ने बताया कि उन्हें शत प्रतिशत अनुदान में गिर और साहीवाल नस्ल की गाय पशुधन विकास विभाग के द्वारा दी गई है। इसके साथ ही गायों के लिए मैट भी दिया गया है, जिसमें वे बैठते है। दोनों ही गाय 10-10 लीटर दूध देती हैं। जिसका कुछ भाग वे अपने घर में उपयोग के लिए रखती हैं तो शेष को गांव के सहकारी समिति में बेंच देती है। इससे उन्हें आर्थिक लाभ भी होता है। इसी तरह जोरातराई की जया बाई ध्रुव को भी शत प्रतिशत अनुदान में गिर नस्ल की 2 गाय मिली। जिनसे पर्याप्त मात्रा में दूध मिल जाता है। घरेलू आवश्यकता की पूर्ति के लिए कुछ मात्रा में दूध वे रख लेती हैं और बाकि को दुग्ध समिति में विक्रय करती है। इस तरह से उनके परिवार को आर्थिक मजबूती भी मिल गई है।

सहकारी समिति से जुड़ रहे पशुपालक

दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति सम्हर के सचिव बोधराम पटेल ने बताया कि जोरातराई गांव में दुग्ध उत्पादन को बढ़ता देख साल 2021 में दुग्ध सहकारी समिति का गठन किया गया। जहां आसपास के गांव सम्हर, बिराजपाली, कौहाकुड़ा, मुड़ागांव, मोंगरापली, लमकेनी, कोटनपाली और सरायपाली से दूध आता है। जिन्हें बीएमसी कौहाकुड़ा भेजा जाता है। वहां से इसको सीलिंग कर देवभोग रायपुर भेज दिया जाता है। जिले के पांचों विकासखंडों से प्रतिदिन हजारों लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है। देवभोग सहकारी समिति सहित विभिन्न डेयरियों को रोजाना 39 हजार लीटर से अधिक दूध की आपूर्ति हो रही है, जिससे किसानों को नियमित आय का स्रोत मिला है।

महिलाओं को मिला डेयरी से रोजगार

पशु चिकित्सा सेवाएं की उप संचालक अंजना नायडू ने बताया कि पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग लगातार प्रयास किया जा रहा हैं। इसी कड़ी में बागबाहरा विकासखंड के ग्राम जोरातराई में आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूह की 19 महिलाओं को शत-प्रतिशत अनुदान पर डेयरी इकाइयां स्थापित कराई गईं। महिलाओं को आधुनिक पशुपालन और डेयरी प्रबंधन का तकनीकी एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण भी दिया गया। साथ ही उन्हें सफल डेयरी मॉडल का अवलोकन के लिए धमतरी जिले का अध्ययन भ्रमण कराया गया। इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। जोरातराई की महिलाएं अब डेयरी व्यवसाय के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। दूध के बेहतर विपणन के लिए गांव में नई दुग्ध सहकारी समिति भी शुरू की गई है, जिससे स्थानीय उत्पादकों को सीधा लाभ मिल रहा है।

पशुपालकों को मिल रही बेहतर सुविधाएं

वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. आर. जी. यादव ने बताया कि दूध महासंघ देवभोग के माध्यम से जिले की 156 दुग्ध सहकारी समितियां किसानों से दूध खरीद रही हैं। वहीं पशुधन विकास विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा बढ़ाने के लिए पशुओं का टीकाकरण, नस्ल सुधार (सेक्स सॉर्टेड सीमेन) तथा पौष्टिक पशु आहार की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
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