छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित SECL गेवरा परियोजना की हैवी ब्लास्टिंग अब आसपास के गांवों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। नरईबोध गांव के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खदान क्षेत्र में लगातार हो रही तेज ब्लास्टिंग का असर उनके घरों और जनजीवन पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि धमाकों के कारण कई मकानों की दीवारों में दरारें आ गई हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, गेवरा परियोजना में होने वाली हैवी ब्लास्टिंग के दौरान तेज कंपन महसूस होता है। कई ग्रामीणों का दावा है कि ब्लास्टिंग के चलते उनके पक्के मकानों में भी दरारें दिखाई देने लगी हैं।
शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं मिलने का आरोप

कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर उछलकर घरों की छत और आंगन तक पहुंच जाते हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। नरईबोध गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार SECL प्रबंधन को अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
मुआवजा और विस्थापन के मुद्दे भी लंबित
ग्रामीणों ने SECL प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि खनन कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, लेकिन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, रोजगार और मुआवजे जैसे मुद्दों का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। इन समस्याओं को लेकर गांव के लोगों में प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि ब्लास्टिंग के कारण उनकी जान और संपत्ति दोनों पर खतरा बना हुआ है।
फिलहाल ग्रामीणों की शिकायतों के बाद अब सभी की नजर SECL प्रबंधन की प्रतिक्रिया पर है। यह देखना होगा कि प्रबंधन इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या पहल की जाती है।