जानकारी के अनुसार, दोनों विद्यालयों में कुल नौ शिक्षक पदस्थ हैं। हालांकि शनिवार को निरीक्षण के दौरान पूरे परिसर में केवल एक शिक्षक, सूरज कुमार, ही मौजूद मिले। बाकी आठ शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। मौजूद शिक्षक ने बताया कि कुछ शिक्षक अवकाश पर हैं, जबकि कुछ बिना किसी पूर्व सूचना के विद्यालय नहीं पहुंचे।
शिक्षकों की कमी से प्रभावित हो रही बच्चों की पढ़ाई
इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों की अनुपस्थिति का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर दिखाई दिया। कई कक्षाओं में बच्चे बिना पढ़ाई के बैठे मिले। जब उनसे सामान्य ज्ञान और गणित से जुड़े सरल सवाल पूछे गए तो अधिकांश छात्र संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इससे विद्यालय में नियमित शिक्षण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिलता। इस शिकायत ने मिड-डे मील योजना के क्रियान्वयन को लेकर भी नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।प्रधान पाठक पर भी लगे गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक देवीप्रसाद पैकरा पदभार ग्रहण करने के बाद से नियमित रूप से विद्यालय नहीं आते। उनका कहना है कि विद्यालयों का समय-समय पर निरीक्षण नहीं होने के कारण शिक्षकों में अनुशासन की कमी बढ़ती जा रही है, जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया तो बच्चों की शिक्षा पर इसका गंभीर असर पड़ेगा। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग