मुंगेली जिले के लालपुर थाना क्षेत्र में स्थित महामाया मंदिर में हुई चोरी की घटना ने श्रद्धालुओं को झकझोर दिया था। रात के अंधेरे में चोरों ने मंदिर का ताला तोड़कर गर्भगृह में प्रवेश किया और मां महामाया की प्रतिमा पर चढ़े सोने-चांदी के आभूषण लेकर फरार हो गए। सुबह जब मंदिर खोला गया तो ताले टूटे मिले और अंदर का सामान बिखरा हुआ था। यह घटना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई थी, क्योंकि वारदात के बाद आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिल रहा था। हालांकि, पुलिस ने तकनीकी जांच और लगातार प्रयासों के बाद चोरी की गुत्थी सुलझा ली।
जिले में बढ़ती चोरी की घटनाओं को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने सभी थाना और चौकी प्रभारियों को अज्ञात आरोपियों की पहचान कर चोरी गई संपत्ति बरामद करने के निर्देश दिए थे। एसएसपी के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवनीत कौर छाबड़ा, एसडीओपी माधुरी धिरही और डीएसपी हरविंदर सिंह के मार्गदर्शन में विशेष टीम बनाई गई। साइबर सेल और लालपुर थाना पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ पुराने अपराधियों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखकर जांच शुरू की।
कंतेली महामाया मंदिर में हुई थी पहली चोरी
29 जून 2026 को ग्राम कंतेली स्थित आदि श्री महामाया मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधि सुरेश यादव ने लालपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 28 और 29 जून की दरम्यानी रात अज्ञात चोरों ने मंदिर का ताला तोड़कर गर्भगृह में प्रवेश किया और देवी प्रतिमा से चांदी का मुकुट, चांदी की माला, सोने का मंगलसूत्र, करधन, कटहर सहित कई धार्मिक आभूषण चोरी कर लिए। मामले में पुलिस ने अपराध क्रमांक 104/2026 के तहत बीएनएस की धारा 331(2), 305(डी), 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की थी। कई दिनों की जांच के बाद पुलिस को कुछ अहम तकनीकी जानकारी मिली। इसके आधार पर पुलिस का शक नगपुरा निवासी अश्वनी आहिरे पर गया। 19 जुलाई 2026 को पुलिस ने अश्वनी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआत में उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ के बाद उसने चोरी की पूरी कहानी बता दी।तीन आरोपियों ने मिलकर की थी चोरी
पूछताछ में अश्वनी ने बताया कि उसने अपने जीजा मंजीत पुरले और साथी पप्पू उर्फ सुनील गोस्वामी के साथ मिलकर मंदिर चोरी की योजना बनाई थी। तीनों ने रात करीब 12 से 1 बजे के बीच लोहे के हथौड़े से कंतेली महामाया मंदिर का चैनल गेट तोड़ा और गर्भगृह में पहुंचकर आभूषण चोरी कर लिए। वारदात के बाद चोरी का सामान जमकोर पहुंचाकर पप्पू की मां चंपाबाई गोस्वामी के पास छिपा दिया गया था। पुलिस पूछताछ में अश्वनी ने एक और बड़ा खुलासा किया। उसने बताया कि वर्ष 2025 में ग्राम कोदवाबानी स्थित महामाया मंदिर में हुई चोरी की वारदात में भी वही गिरोह शामिल था। उस चोरी में मंदिर से करीब 96 हजार रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण चोरी किए गए थे। इस मामले में लालपुर थाने में अपराध क्रमांक 110/2025 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
कबीरधाम के मंदिर चोरी से भी जुड़े तार
पुलिस के अनुसार पूछताछ में अश्वनी ने कबीरधाम जिले के ग्राम सिल्हाटी स्थित महादेव मंदिर में हुई चोरी की घटना में भी शामिल होने की बात स्वीकार की। उसने बताया कि करीब 10 से 15 दिन पहले साथियों के साथ मिलकर वहां भी चोरी की गई थी। चोरी के आभूषण भी चंपाबाई गोस्वामी के पास छिपाकर रखे गए थे। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी मंजीत पुरले और पप्पू उर्फ सुनील गोस्वामी पहले से ही एक अन्य मामले में कवर्धा के पोड़ी जेल में बंद हैं। इसके बाद पुलिस ने पप्पू की मां चंपाबाई गोस्वामी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसने चोरी के आभूषण अपने पास रखने की बात स्वीकार कर ली। पुलिस ने उसके कब्जे से सभी चोरी के आभूषण बरामद कर लिए।1.75 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण जब्त
पुलिस ने मंदिर चोरी की घटनाओं और पोड़ी थाना क्षेत्र की चोरी से जुड़े कुल करीब 1 लाख 75 हजार रुपये मूल्य के आभूषण बरामद किए हैं। बरामद सामान में चांदी के मुकुट, माला, करधन, ढार, सिक्कों वाली माला, सोने की पत्ती और अन्य धार्मिक आभूषण शामिल हैं। पुलिस ने इस मामले में अश्वनी आहिरे (24 वर्ष), निवासी नगपुरा और चंपाबाई गोस्वामी निवासी जमकोर को गिरफ्तार किया है। दोनों को 19 जुलाई 2026 को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। वहीं, आरोपी मंजीत पुरले और पप्पू उर्फ सुनील गोस्वामी पहले से ही अन्य मामलों में जेल में बंद हैं। पुलिस अब मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।