ECG vs Echo: कई बार सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलने, सीने में दर्द, सुबह-शाम की हल्की वॉक में अधिक थकान या सांस लेते समय सीने में दर्द की शिकायत होने पर डॉक्टर हार्ट टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। ऐसे में मरीज को ECG या Echo जांच करवाने को कहा जा सकता है।
ECG और Echo दोनों ही दिल की महत्वपूर्ण जांच हैं, लेकिन इनका उद्देश्य अलग-अलग होता है। ECG दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी और हार्ट रिदम रिकॉर्ड करता है, जबकि Echo दिल की संरचना, वाल्व, रक्त प्रवाह और पंपिंग क्षमता की तस्वीर दिखाता है।
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लक्षणों के आधार पर टेस्ट का चयन
किस मरीज को ECG की जरूरत है और किसे Echo कराना चाहिए, इसका फैसला उसके लक्षणों, स्वास्थ्य इतिहास और डॉक्टर को मिलने वाली क्लिनिकल जानकारी के आधार पर किया जाता है। क्लीवलैंड क्लीनिक के अनुसार, ECG यानी Electrocardiogram एक तेज, सामान्य और बिना दर्द वाली जांच है। इसमें छाती और जरूरत के अनुसार हाथ-पैर पर छोटे इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं। ये इलेक्ट्रोड दिल से निकलने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नल रिकॉर्ड करते हैं और मशीन उन्हें ग्राफ के रूप में दिखाती है। इससे डॉक्टर हार्ट रेट, धड़कन की नियमितता और इलेक्ट्रिकल सिग्नल की स्थिति समझ सकते हैं।
हार्ट संबंधी गड़बड़ी की जांच
ECG खासतौर पर एरिदमिया, बहुत तेज या धीमी हार्ट रेट और कुछ मामलों में हार्ट अटैक के संकेतों का पता लगाने में मदद कर सकता है। यह दिल तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति से जुड़ी गड़बड़ियों के संकेत भी दे सकता है। सीने में दर्द, धड़कन तेज या अनियमित महसूस होना, चक्कर आना, सांस फूलना और कमजोरी जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर ECG कराने की सलाह दे सकते हैं।
Echo क्या जांचता है?
स्टैनफोर्ड हेल्थ के अनुसार, Echo यानी Echocardiogram को सामान्य भाषा में दिल का अल्ट्रासाउंड कहा जाता है। इसमें हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स की मदद से धड़कते हुए दिल की चलती तस्वीरें तैयार की जाती हैं। यह जांच दिल के आकार, दीवारों की मोटाई और गति, चैम्बर्स, वाल्व और रक्त प्रवाह की जानकारी देती है। इससे डॉक्टर देख सकते हैं कि दिल कितनी प्रभावी तरीके से खून पंप कर रहा है।
रक्त प्रवाह और पंपिंग की जांच
Echo से यह भी पता लगाया जा सकता है कि हार्ट वाल्व ठीक से खुल और बंद हो रहे हैं या नहीं और कहीं वाल्व से रक्त पीछे की ओर तो नहीं जा रहा है। कुछ मामलों में Echo दिल के आसपास की संरचनाओं, चैम्बर्स के बीच असामान्य छेद और खून के थक्के जैसी समस्याओं का पता लगाने में भी सहायता करता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, ECG दिल की इलेक्ट्रिकल वेव्स को मापता है, जबकि Echo साउंड वेव्स की मदद से दिल की संरचना और उसकी कार्यक्षमता की तस्वीर तैयार करता है।
ECG से किन समस्याओं का पता चलता है?
ECG कई प्रकार की हृदय संबंधी स्थितियों की शुरुआती जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे एरिदमिया, हार्ट अटैक के संकेत, पिछली हार्ट डैमेज की संभावना और कुछ मामलों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज से जुड़े बदलावों की जानकारी मिल सकती है। Echo उन स्थितियों में विशेष रूप से उपयोगी होता है, जिनमें डॉक्टर को दिल की संरचना या पंपिंग क्षमता की जानकारी चाहिए होती है।
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