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स्वाइन फ्लू के 38 मामले, रायपुर में सर्वाधिक 25 मरीज
स्वाइन फ्लू के 38 मामले, रायपुर में सर्वाधिक 25 मरीज
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बारिश के बीच छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू की दस्तक, रायपुर में सबसे ज्यादा 25 केस

छत्तीसगढ़ में बदलते मौसम और बारिश के बीच स्वाइन फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं। प्रदेश में अब तक 38 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिनमें अकेले रायपुर के 25 मरीज शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में संदिग्ध मरीजों की जांच बढ़ा दी है। विशेषज्ञों ने तेज बुखार, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 23 Aug 2026, 10:19 AM · अपडेट: 02 Oct 2026, 08:42 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ में मौसम के बदलते मिजाज और रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच स्वाइन फ्लू ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश में अब तक 38 मरीजों में इस बीमारी की पुष्टि हो चुकी है। चिंता की बात यह है कि कुल मामलों में से अकेले रायपुर में ही 25 मरीज मिले हैं, जिनमें से आधे से अधिक का इलाज अभी जारी है। राजधानी के अलावा बिलासपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार, बस्तर, बेमेतरा और रायगढ़ जिलों से भी मरीज सामने आए हैं। हालात को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। 

फ्लू अब महामारी नहीं, मौसमी इन्फ्लूएंजा का हिस्सा 

सरकारी अस्पतालों में सर्दी, खांसी और बुखार के संदिग्ध मरीजों की लैब टेस्ट कराई जा रही है, ताकि समय रहते पहचान कर इलाज शुरू किया जा सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, स्वाइन फ्लू अब किसी महामारी की तरह नहीं, बल्कि मौसमी इन्फ्लूएंजा का ही एक हिस्सा बन चुका है। बंद कमरों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और कम हवादार जगहों पर इसका संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। 

बच्चों और गर्भवती महिलाओं का ज्यादा खतरा 

स्कूल, दफ्तर, बस या ट्रेन जैसी जगहों पर संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदें दूसरों को भी बीमार कर सकती हैं। मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. आर. एल. खरे ने बताया कि इसके लक्षण सामान्य मौसमी बीमारियों से काफी मिलते-जुलते हैं। अगर अचानक तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द, ठंड लगना या ज्यादा थकान महसूस हो, तो इसे हलके में न लें। सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या लगातार तेज बुखार बना रहे तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पुरानी बीमारियों (जैसे डायबिटीज या सांस की बीमारी) से पीड़ितों को इससे ज्यादा खतरा रहता है।

बचाव और सावधानियां: क्या करें और क्या न करें

  • घर पर रहें: लक्षण दिखने पर मरीज खुद को आइसोलेट करें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।

  • मुंह और नाक ढंकें: खांसते या छींकते समय रुमाल या टिशू का इस्तेमाल जरूर करें।

  • हाथों की सफाई: समय-समय पर साबुन और पानी से हाथ धोते रहें।

  • हवादार कमरे: जिस कमरे में रहें, वहां ताजी हवा और वेंटिलेशन का सही ध्यान रखें।

  • मास्क पहनें: बाहर निकलते समय या अन्य लोगों के संपर्क में आने पर मास्क का प्रयोग करें।

  • खुद डॉक्टर न बनें: लक्षण नजर आने पर मनमर्जी से दवा लेने की बजाय तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

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