रिमांड पर ED के हवाले पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, बघेल बोले– एजेंसियों के पास सबूत नहीं
छत्तीसगढ़ के कथित 3,400 करोड़ रुपये के शराब घोटाला मामले में ED ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने उन्हें पांच दिनों की ED रिमांड पर भेजा है। सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अग्रवाल से मुलाकात कर जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित 3,400 करोड़ रुपये के शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED ने प्रदेश कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार कर रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया, जहां से कोर्ट ने उन्हें 5 दिनों के लिए ED की रिमांड पर भेज दिया है। अब 17 अगस्त को उन्हें दोबारा अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। इसी बीच, मंगलवार को सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद कोर्ट पहुंचे और रामगोपाल अग्रवाल से मुलाकात की।
रामगोपाल को हिरासत में लेकर पूछताछ
राजनीतिक हलचल के बीच बघेल ने जांच एजेंसियों की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई केवल परेशान करने और पार्टी को बदनाम करने के मकसद से की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि एजेंसियों के पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं, केवल फर्जी गवाहों के दम पर मामला तैयार किया जा रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) रामगोपाल अग्रवाल को हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है।
बढ़ाई गई थी रिमांड की कस्टडी
अब ED धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और पैसों के लेन-देन से जुड़े पहलुओं पर उनसे कड़ी पूछताछ करेगी। कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन सालों से एजेंसियों की पहुंच से दूर थे। आखिरकार 8 जुलाई को उन्होंने EOW दफ्तर पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद मेडिकल जांच के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से 9 जुलाई से 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड दी गई थी। बाद में रिमांड की अवधि बढ़ाते हुए उन्हें 5 अगस्त तक कस्टडी में रखा गया था। कई दिग्गज नेता पहुंचे मुलाकात करने
राजनीतिक गलियारों में इस गिरफ्तारी की काफी चर्चा है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल अब तक दो बार रामगोपाल अग्रवाल से मिल चुके हैं। 25 जुलाई को पहली बार जब अग्रवाल को जेल भेजा जा रहा था, तब बघेल समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने उनसे मुलाकात की थी। इसके बाद 11 अगस्त को बघेल दूसरी बार उनसे मिलने कोर्ट परिसर पहुंचे। छत्तीसगढ़ का यह मामला सरकारी शराब व्यापार में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं, अवैध वसूली और सिंडिकेट बनाकर पैसों के लेन-देन से जुड़ा है।
2,000 करोड़ से बढ़कर 3,400 करोड़ हुआ आंकड़ा: ED ने शुरुआती FIR एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में दर्ज कराई थी, जिसमें 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का उल्लेख था। हालांकि, जांच आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा बढ़कर 3,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
सिंडिकेट का नेटवर्क: ED के दावों के मुताबिक, तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान यह घोटाला एक मजबूत सिंडिकेट द्वारा चलाया जा रहा था। इसमें वरिष्ठ IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन MD AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर की मुख्य भूमिका बताई गई है।
नकली होलोग्राम से अवैध बिक्री: ACB की जांच रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 से 2022 के बीच राज्य की सरकारी शराब दुकानों से डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर अवैध शराब बेची गई। इस समानांतर व्यवस्था से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हुआ।
आगे क्या?
ED की गिरफ्त में आने के बाद रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ के दौरान इस सिंडिकेट से जुड़ी कई और परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 5 दिनों की इस रिमांड अवधि में एजेंसियों को कई अन्य रसूखदारों के नाम और बेनामी लेन-देन के पुख्ता सुराग मिल सकते हैं।