PM Awas Yojana CG: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में अपना पक्का मकान बनने का सपना देख रहे हजारों परिवारों के लिए एक बड़ा अपडेट सामने आया है। आवास प्लस 2.0 सर्वे (2024) के आधार पर तैयार की गई प्राथमिक सूची में से चार जनपदों के 1,393 परिवारों के नामों पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। हालांकि, योजना के तहत चार जनपदों में कुल 75,461 परिवारों का सर्वे किया गया था, जिनमें से 74,068 हितग्राहियों को ग्राम सभाओं की मंजूरी के बाद पूरी तरह पात्र पाया गया है। अगर प्रतिशत के हिसाब से देखें तो लगभग 98 फीसदी परिवारों का चयन पक्के मकान के लिए हो चुका है। वहीं, जिन लोगों के नाम अपात्र सूची में डाले गए हैं, उन्हें प्रशासन ने एक और मौका दिया है।
28 सितंबर से शुरू हुई दावा-आपत्ति की प्रक्रिया
यदि किसी परिवार को लगता है कि उसे गलत तरीके से अपात्र घोषित किया गया है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे हितग्राही 28 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच अपनी संबंधित ग्राम सभा में लिखित रूप से दावा-आपत्ति जमा कर सकते हैं। ध्यान रहे कि आवेदन के साथ अपनी पात्रता साबित करने वाले सभी आवश्यक दस्तावेज और सटीक जानकारी संलग्न करना अनिवार्य होगा। 10 अक्टूबर की समय-सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। अधूरा या अस्पष्ट आवेदन होने की स्थिति में भी उसे खारिज कर दिया जाएगा। ग्राम सभा से आवेदन मिलने के बाद जिला स्तरीय समिति दस्तावेजों की कड़ाई से जांच करेगी और अंतिम फैसला लेगी।
आरंग में सबसे ज्यादा छंटनी, तिल्दा की स्थिति सबसे बेहतर
चारों जनपदों की तुलना करें तो सबसे ज्यादा नाम आरंग जनपद से काटे गए हैं।
आरंग: कुल 25,814 परिवारों में से 25,138 पात्र पाए गए, जबकि 676 नाम अपात्र घोषित हुए।
धरसींवा: 11,540 परिवारों में से 330 नाम अपात्र मिले।
अभनपुर: 18,352 आवेदनों में से 257 परिवार सूची से बाहर हुए।
तिल्दा: 19,755 में से महज 130 परिवार अपात्र पाए गए, जो चारों जनपदों में सबसे कम है।
दूसरों के भरोसे न रहें, खुद जाकर जांचें सूची
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पात्र और अपात्र परिवारों की सूची जिला कार्यालय, विकासखंड कार्यालय और संबंधित ग्राम पंचायत भवनों के सूचना पटल पर चस्पा कर दी गई है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे किसी बिचौलिए या अफवाह के चक्कर में न पड़ें। वे खुद पंचायत भवन या जनपद कार्यालय जाकर सूची में अपना और अपने परिवार का नाम जांच लें, ताकि समय रहते 10 अक्टूबर तक अपनी आपत्ति दर्ज करा सकें।

