18 महीने बाद जेल से बाहर आएगा पूर्व RTO आरक्षक सौरभ शर्मा, हाई कोर्ट से मिली सशर्त जमानत
मध्य प्रदेश के चर्चित सौरभ शर्मा केस में हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व RTO आरक्षक को शर्तों के साथ जमानत दे दी है। 52 किलो सोना, 200 किलो चांदी और करीब 10 करोड़ रुपये नकद बरामदगी मामले में सौरभ शर्मा पिछले 18 महीने से जेल में बंद थे। कोर्ट ने 10 लाख रुपये के निजी मुचलके समेत कई सख्त शर्तों के साथ रिहाई का आदेश दिया है।
मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल मामलों में शामिल सौरभ शर्मा केस में एक बड़ा मोड़ आया है। करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति, 52 किलो सोना, 200 किलो चांदी और करीब 10 करोड़ रुपये नकद बरामदगी के मामले में घिरे पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा को आखिरकार मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से राहत मिल गई है। लगभग डेढ़ साल (18 महीने) तक जेल में वक्त बिताने के बाद कोर्ट ने उन्हें शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया है। यह फैसला जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने सुनाया।
कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज की
अदालत में 31 जुलाई को ही इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली गई थी, जिसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। मंगलवार शाम कोर्ट ने अपना विस्तृत आदेश जारी किया। सौरभ शर्मा को यह राहत तीसरे प्रयास में जाकर मिली है। इससे पहले निचली अदालत और हाई कोर्ट दोनों ही उनकी नियमित जमानत अर्जी को खारिज कर चुके थे। यहां तक कि पत्नी की बीमारी के आधार पर मांगी गई अंतरिम राहत भी अदालत ने स्वीकार नहीं की थी। हालांकि, इस बार लंबे समय से चल रही न्यायिक हिरासत और ट्रायल में हो रही देरी को मुख्य आधार बनाकर नई याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जमानत मंजूर कर ली।
जमानत का किया था विरोध
सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमानत का तीखा विरोध किया। ED का कहना था कि यह बेहद गंभीर आर्थिक अपराध का मामला है और आरोपी को राहत नहीं मिलनी चाहिए, लेकिन अदालत ने बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए जमानत स्वीकार कर ली।
हाई कोर्ट ने रिहाई का आदेश देते हुए सौरभ शर्मा पर कई सख्त शर्तें लागू की हैं:
10 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की स्थानीय जमानत पेश करनी होगी।
आरोपी किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेगा और न ही साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ करेगा।
अदालत की पूर्वानुमति के बिना देश से बाहर (विदेश) यात्रा करने पर पूर्ण पाबंदी रहेगी।
ट्रायल कोर्ट में चलने वाली हर सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य होगा।
कार से संपत्ति और नकदी बरामद
सौरभ शर्मा मध्य प्रदेश परिवहन विभाग (RTO) में बतौर आरक्षक कार्यरत था। उसे यह नौकरी अनुकंपा नियुक्ति के तहत मिली थी। कुछ सालों तक नौकरी करने के बाद उसने अचानक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी। दिसंबर 2024 में यह नाम तब देश भर की सुर्खियों में आया, जब उसके ठिकानों और उससे जुड़ी एक कार से बेहिसाब संपत्ति और नकदी बरामद हुई। छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों को 52 किलो सोना, 200 किलो से अधिक चांदी और करीब 10 करोड़ रुपये नकद मिले थे। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच लोकायुक्त, आयकर विभाग (IT) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी देश की शीर्ष एजेंसियां मिलकर कर रही हैं। जांच एजेंसियों की मानें तो सौरभ की बेनामी संपत्तियों के तार विदेशों तक फैले हुए हैं।