रायपुर के जयस्तंभ चौक स्थित रिलायंस ज्वेल्स शोरूम में लाखों रुपए के सोने के कंगन गायब होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि शोरूम के पूर्व सेल्स कर्मचारी ने असली 22 कैरेट सोने के कंगनों की जगह नकली कंगन रखकर स्टॉक में हुई गड़बड़ी को छिपाने की कोशिश की।
इस मामले में शोरूम प्रबंधन की शिकायत पर गोलबाजार थाना पुलिस ने पूर्व कर्मचारी मनोज यादव के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, स्टॉक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।
स्टॉक जांच में सामने आई लाखों की गड़बड़ी
गोलबाजार थाना प्रभारी स्वराज त्रिपाठी के मुताबिक, शोरूम के स्टोर मैनेजर आरिफ खान ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार 9 जुलाई 2026 को कंगन काउंटर के स्टॉक का मिलान किया गया था। जांच के दौरान 22 कैरेट सोने के तीन सेट यानी पांच कंगनों की जगह नकली कंगन रखे मिले। गायब हुए असली कंगनों का कुल वजन 103.832 ग्राम बताया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 17.50 लाख रुपए है। शोरूम की आंतरिक जांच में तत्कालीन सेल्स स्टाफ मनोज यादव की भूमिका संदिग्ध पाई गई। कंपनी के अनुसार, जिस काउंटर से कंगन गायब हुए, उसकी जिम्मेदारी मनोज यादव के पास थी। जांच के दौरान सीसीटीवी रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की गई। इसके बाद कंपनी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
बिना हैंडओवर दिए छोड़ी नौकरी
पुलिस जांच में सामने आया कि मनोज यादव ने 6 जुलाई 2026 को कंपनी के पोर्टल पर इस्तीफा दिया था। उसने 7 जुलाई को अपना आखिरी कार्य दिवस बताया था, लेकिन वह 2 जुलाई के बाद से ही शोरूम नहीं पहुंचा। बताया गया कि उसने मां की तबीयत खराब होने का हवाला देकर छुट्टी ली थी। इसके बाद उसने निर्धारित प्रक्रिया के तहत हैंडओवर भी नहीं किया और नौकरी छोड़ दी। कंपनी की ओर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वह वापस नहीं आया।ऑडिट के दौरान टैग बदलने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मनोज यादव ने 5 मई को हुई ग्लोबल फिजिकल इन्वेंट्री और 17 जून को हुए इंटरनल ऑडिट के दौरान कंगनों के टैग में बदलाव किया था। आरोप है कि टैग बदलकर स्टॉक रिकॉर्ड को सही दिखाने की कोशिश की गई। शिकायत के मुताबिक, एक सेट को ऐसी जगह हटाया गया, जहां सीसीटीवी कैमरों की निगरानी नहीं थी। फिलहाल गोलबाजार थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों और आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।