कर्ज के दलदल और सूदखोरों की प्रताड़ना ने एक और किसान की बलि ले ली। ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र में रहने वाले 50 वर्षीय किसान तिलक सिंह राणा की मौत के मामले में पुलिस ने अब जाकर बड़ा कदम उठाया है। किसान को खुदकुशी के लिए मजबूर करने वाले तीन सूदखोरों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। यह पूरा मामला त्यागी नगर का है। 9 जुलाई को तिलक सिंह राणा अचानक अपने घर से निकले थे, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटे। बाद में यूनिवर्सिटी थाना क्षेत्र के एजी पुल के पास रेलवे ट्रैक पर उनका शव मिला। उन्होंने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
मांगी थी 1 महिने की मोहलत
पुलिस को घटनास्थल से दो पन्नों का एक सुसाइड नोट मिला था, जिसने पूरे मामले का सच सामने ला दिया। जांच और सुसाइड नोट से सामने आई कहानी किसी का भी कलेजा कंपा दे। किसान तिलक सिंह ने आरोपी जितेंद्र शर्मा से 5 लाख रुपये उधार लिए थे। अपनी हैसियत के हिसाब से वे 3 लाख रुपये चुकता भी कर चुके थे। बाकी बचे 2 लाख रुपये चुकाने के लिए उन्होंने सिर्फ एक महीने की मोहलत मांगी थी। लेकिन कर्ज देने वाले जितेंद्र शर्मा, उसके साले गजेंद्र पुरोहित और लक्ष्मीनारायण पर जैसे खून सवार था। वे एक महीने का समय देने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने किसान के साथ न सिर्फ मारपीट की, बल्कि फोन पर धमकी दी कि अगर तुरंत पैसे नहीं दिए तो घर में घुसकर पीटेंगे।
तिलक सिंह ने अपनी मौत से पहले सुसाइड नोट में अपना दर्द बयां करते हुए लिखा—
"मैंने 5 लाख में से 3 लाख रुपये चुका दिए थे। सिर्फ 2 लाख रुपये बाकी थे, जिसके लिए एक महीने का समय मांगा था। लेकिन जितेंद्र, गजेंद्र और लक्ष्मीनारायण लगातार धमका रहे थे। इन्होंने मेरे साथ मारपीट की और धमकी दी कि घर आकर पीटेंगे। वे घर आकर मारपीट करते और समाज में मेरी इज्जत नीलाम होती, इससे बेहतर है कि मैं खुद अपनी जान दे दूं।"
आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज
घटना के बाद पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर हैंडराइटिंग की जांच कराई और परिजनों के बयान दर्ज किए। साक्ष्यों और सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों—जितेंद्र शर्मा, गजेंद्र पुरोहित और लक्ष्मीनारायण के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment to Suicide) का मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश और आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।