भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। देश को ट्रैक एंड फील्ड पर एक ऐसा नया सुपरस्टार मिल गया है, जिसने अपनी रफ्तार से बरसों पुराने रिकॉर्ड्स को चकनाचूर कर दिया है। रांची में आयोजित नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन कप के दूसरे दिन पंजाब के सनसनीखेज धावक गुरिंदरवीर सिंह ने पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा में वो कारनामा कर दिखाया, जो आज तक कोई भारतीय नहीं कर सका था।
गुरिंदरवीर ने महज 10.09 सेकेंड में रेस पूरी कर नया नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है और इसके साथ ही वे आधिकारिक तौर पर "भारत के सबसे तेज धावक" बन गए हैं।
इतिहास रचने वाले गुरिंदरवीर सिंह कौन हैं?
पंजाब के जालंधर के रहने वाले गुरिंदरवीर सिंह एक अंतरराष्ट्रीय स्प्रिंटर हैं। घरेलू सर्किट पर लंबे समय से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे गुरिंदरवीर इस प्रतियोगिता में रिलायंस फाउंडेशन का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। रांची फेडरेशन कप के फाइनल में उन्होंने जैसी ही फिनिश लाइन पार की, वैसे ही उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स में अपना नाम हमेशा के लिए अमर कर लिया।
इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों ने उन्हें ‘फास्टेस्ट मैन इन इंडियन हिस्ट्री’ (भारतीय इतिहास का सबसे तेज धावक) का खिताब दिया है।
10.10 सेकेंड की दीवार तोड़ने वाले पहले भारतीय
गुरिंदरवीर सिंह की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वे 100 मीटर की दौड़ को 10.10 सेकेंड से कम समय में पूरा करने वाले भारत के पहले एथलीट बन गए हैं। इस अभूतपूर्व टाइमिंग के साथ ही उन्होंने आगामी एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भी सीधे क्वालीफाई कर लिया है, जहां अब उनसे देश को मेडल की बड़ी उम्मीदें होंगी।
सीएम भगवंत मान ने थपथपाई पीठ, कहा- "हमें गर्व है"
पंजाब के इस गबरू की ऐतिहासिक सफलता पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गद्गद होते हुए सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने ट्वीट कर बधाई देते हुए लिखा:
"हमारे होनहार खिलाड़ी गुरिंदरवीर सिंह को रांची फेडरेशन कप में 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने पर हार्दिक बधाई। हमारे बहादुर नौजवान ने 10.09 सेकेंड का समय निकालकर नया नेशनल रिकॉर्ड बना दिया है। पूरा पंजाब और देश आपकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।"
अब नजरें ओलंपिक और वर्ल्ड स्टेज पर
गुरिंदरवीर सिंह की इस ऐतिहासिक दौड़ ने भारतीय स्प्रिंटिंग को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उन्हें इसी तरह रिलायंस फाउंडेशन और सरकार की तरफ से विश्वस्तरीय ट्रेनिंग और एक्सपोजर मिलता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब कोई भारतीय धावक ओलंपिक के ट्रैक पर भी दुनिया के दिग्गज एथलीटों को टक्कर देता नजर आएगा।
