बस्तर ब्लॉक की कुमली पंचायत में वन भूमि पर खेती करने को लेकर वन विभाग और किसानों के बीच विवाद की स्थिति बन गई है। वन विभाग ने करीब 6 हेक्टेयर यानी लगभग 15 एकड़ वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के दौरान खेतों में लगी मक्के की फसल को नष्ट कर दिया गया।
वन विभाग के अनुसार, चार लोगों ने वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर मक्के की खेती की थी। सूचना मिलने के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ट्रैक्टर की मदद से खड़ी फसल को हटाने की कार्रवाई की गई। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई वन भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ की गई है।
चार लोगों पर कार्रवाई, जांच जारी
वन विभाग ने बताया कि फिलहाल चार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अधिकारियों के अनुसार, पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
किसानों ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
वहीं, वन विभाग की इस कार्रवाई को लेकर किसानों में नाराजगी है। किसानों का कहना है कि कुमली क्षेत्र में करीब 100 किसान लंबे समय से खेती करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि बिना पूरी जांच के केवल कुछ लोगों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है।
पंचायत के फैसले का हवाला दे रहे किसान
किसान हेमलाल पांडे का कहना है कि पंचायत की बैठक में खड़ी फसल को लेकर तीन महीने की मोहलत देने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बावजूद खेतों में लगी मक्के की फसल को ट्रैक्टर चलाकर नष्ट कर दिया गया, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
जमीन की जांच के बाद कार्रवाई की मांग
किसानों का कहना है कि यदि किसी तरह का अतिक्रमण हुआ है तो पुराने रिकॉर्ड और जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच के बाद कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सभी प्रभावित किसानों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
वन विभाग और किसानों के दावों के बीच जांच पर नजर
फिलहाल मामले में वन विभाग अपनी कार्रवाई को नियमों के तहत बता रहा है, जबकि किसान इसे जल्दबाजी में की गई कार्रवाई बता रहे हैं। अब पूरे मामले की जांच के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।