छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में जमीन बेचने का झांसा देकर 8 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि आरोपी ने खुद को जमीन का मालिक बताकर सौदा किया, रकम ले ली, लेकिन बाद में न तो जमीन की रजिस्ट्री कराई और न ही तय वादा पूरा किया।
परिवादी जितेंद्र अग्रवाल के अनुसार, वर्ष 2019 में उनकी मुलाकात भीमराज नामक व्यक्ति से हुई थी। आरोपी ने ग्राम नवातरिया स्थित करीब एक एकड़ जमीन को अपनी संपत्ति बताते हुए 13 लाख रुपए में बेचने की बात कही। सौदा तय होने पर उन्होंने बयाना के रूप में 5 लाख रुपए देने पर सहमति जताई और किस्तों में भुगतान शुरू किया। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने शुरुआत में 1.95 लाख रुपए और 1.50 लाख रुपए दो अलग-अलग चेकों के माध्यम से प्राप्त किए।
जांच में सामने आई जमीन की असली हकीकत
इसके अलावा 1.55 लाख रुपये नकद भी लिए गए। बाद में सीमांकन और रजिस्ट्री जल्द कराने का भरोसा देकर 11 जनवरी 2020 को 2.50 लाख रुपये तथा 11 सितंबर 2022 को 50 हजार रुपए और लिए। इस तरह आरोपी पर कुल 8 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया गया है। जब लंबे समय तक रजिस्ट्री नहीं हुई तो परिवादी को संदेह हुआ। उन्होंने संबंधित जमीन का ऑनलाइन खसरा और बी-1 रिकॉर्ड निकलवाया। जांच में पता चला कि जिस जमीन को आरोपी अपनी बता रहा था, वह उसके नाम पर दर्ज ही नहीं थी। राजस्व अभिलेखों में जमीन अर्जुन पिता राजूलाल और ज्योति के नाम दर्ज मिली। इसके बाद परिवादी ने खुद के साथ धोखाधड़ी होने का आरोप लगाया।कोर्ट ने FIR दर्ज करने के दिए निर्देश
पुलिस से शिकायत के बाद पहुंचे कोर्ट परिवादी ने पहले थाना दुर्ग और फिर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की, लेकिन मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान जेएमएफसी दुर्ग ने प्रस्तुत दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड का परीक्षण किया।
न्यायालय ने प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी का मामला मानते हुए थाना प्रभारी को आरोपी भीमराज के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 अथवा भारतीय न्याय संहिता की लागू धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब इकरारनामा, बैंक लेन-देन, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित गवाहों के बयानों के आधार पर पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।